Tuesday, June 23, 2026
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जोधपुर-अजमेर वर्कशॉप में तैयार होंगे 100 एनएमजी कोच…

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बीकानेर abhayindia.com news माल लदान को सुगम व आसान बनाने के लिए रेलवे की ओर से निरन्तर नई तकनीक को उपयोग में लाने के कार्य किए जाते है। ऑटोमोबाइल का परिवहन आसान व सुरक्षित हो इसके लिए न्यू मॉडिफाइड गुड्स (एनएमजी) कोच का निर्माण रेलवे की ओर से किया जा रहा है।

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जन सम्पर्क अधिकारी सुनील बेनीवाल के अनुसार उत्तर पश्चिमी रेलवे के महाप्रबंधक आनन्द प्रकाश के दिशा-निर्देशों के अनुसार उत्तर पश्चिम रेलवे पर न्यू मॉडिफाइड गुड्स (एनएमजी) कोचज का निर्माण जोधपुर और अजमेर वर्कशॉप में लक्ष्यानुसार किया जा रहा है जिसके तहत जोधपुर वर्कशॉप में न्यू मॉडिफाइड गुड्स (एनएमजी) कोच तैयार होना प्रारम्भ हो गए है।

जोधपुर वर्कशॉप में पहला कोच एनएमजी कोच तैयार कर दिया गया है और अन्य का कार्य प्रगति पर है। रेलवे वर्कशॉप में 20 वर्ष या उससे अधिक आयुवर्ग के कोचों को ऑटोमोबाइल कैरियर ले जाने के लिए एयर ब्रेक कोच में परिवर्तित किया जा रहा है। इन कोच को न्यू मॉडिफाइड गुड्स (एनएमजी) एवं इन कोचों से तैयार रैक को न्यू मॉडिफाइड गुड्स (एनएमजी) रैक के नाम से जाना जाता है।

एक एनएमजी रैक में डिजायन किए 22 से 23 एनएमजी कोच होते है , प्रत्येक कोच में 5 कार का परिवहन करने की क्षमता है, इस प्रकार एक रैक के माध्यम से लगभग 125 कारों का परिवहन किया जा सकता है।  उत्तर पश्चिम रेलवे को रेलवे बोर्ड की ओर से 100 कोच को एनएमजी कोच में परिवर्तित करने का लक्ष्य प्रदान किया गया है जिसमें जोधपुर वर्कशॉप को 40 व अजमेर वर्कशॉप को 60 कोच आवंटित किए गए है, इनको लक्ष्यानुसार तैयार किए जाने का कार्य शुरू हो गया हैं।

एनएमजी कोच के परिवर्तन में मुख्यत: कोच इंटीरियर की स्ट्रिीपिंग करना, खिड़कियों एवं दरवाजों को हटाकर उनको बंद करना, कोच के दोनों छोरों पर दरवाजें लगाना , एंड पैनल को हटाने का कार्य, फ्लोर के मोडिफिकेशन का कार्य, चैनल लगाने का कार्य, कटिंग और रिपेयरिंग सम्बंधित कार्य एवं कोच के अन्दर व बाहर पेंटिंग के कार्य किए जाते है।

यह है विशेषता…

इन कोच की भार वहन क्षमता 9.2 टन है, इनकी अधिकतम गतिसीमा 75 किलोमीटर प्रति घंटा है, एनएमजी परिवर्तन की तिथि से 10 वर्ष या कुल 35 वर्ष जो भी पहले है, कोच में उन्नत प्रकार की एडजेस्टेबल सैन्ट्रल लॉकिंग का प्रावधान किया गया है, जिससे परिवहन के दौरान व्हीकल्स् के डेमैज होने की संभावना नहीं रहती,आवधिक अनुरक्षण अवधि 24 माह, कोच को न्यू मॉडिफाइड गुड्स (एनएमजी) में परिवर्तित करने का खर्च बहुत ही किफायती है एक कोच की लागत लगभग 10 लाख तक आती है।

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