









जयपुर Abhayindia.com राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर अब सियासत गर्मा गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के बाद इस अभियान के तहत बॉर्डर के 15 से 50 किलोमीटर के संवेदनशील दायरे में बिना वैध प्रशासनिक अनुमतियों के स्थाई निर्माणों को ध्वस्त किया जा रहा है। इस कार्रवाई के विरोध में हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी उतर आए है। उन्होंने इस पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए सोशल मीडिया पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज की है।
ओवैसी ने गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए लिखा, “राजस्थान के सीमावर्ती जिलों बीकानेर, फलौदी, जैसलमेर और बाड़मेर में मस्जिदों, दरगाहों और अन्य मुस्लिम धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर ढहाने की एक लहर सी चल पड़ी है। मैंने एआईएमआईएम के बीकानेर जिला अध्यक्ष शफी जमील कासमी से बात की है, जिन्होंने बताया कि बीकानेर में 4 मस्जिदें और फलौदी, जैसलमेर व बाड़मेर में 9 मस्जिदें और दरगाहें पहले ही ध्वस्त की जा चुकी हैं। खबरों के अनुसार सैकड़ों अन्य धार्मिक स्थलों को भी इसी तरह के नोटिस जारी किए गए हैं। इन प्रशासनिक कार्रवाइयों के दायरे में जैसलमेर के रामगढ़-तनोट बाईपास रोड पर स्थित हजरत महमूद शाह जिलानी की लगभग 250 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक दरगाह भी आ रही है, जो कि बेहद चिंताजनक है।”
ओवैसी ने अपनी पोस्ट में सुरक्षा के तर्कों को खारिज करते हुए आगे लिखा, “इन ढांचों को गिराए जाने के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा के आधारों को सही ठहराया जा रहा है। हालांकि, इन सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय नागरिकों में से कोई भी कभी भी इस तरह की किसी भी राष्ट्रविरोधी गतिविधि में शामिल नहीं रहा है। केवल मुस्लिम इबादतगाहों को ही निशाना बनाया जा रहा है। अधिकारियों ने पहले दावा किया कि कुछ ढांचे चरागाह भूमि पर बने हैं। लेकिन जिन मामलों में यह दिखाया गया कि ये ढांचे पूरी तरह से निजी संपत्ति पर स्थित हैं, वहां प्रशासन का आरोप कथित तौर पर आवश्यक अनुमतियों या सरकारी मंजूरियों की कमी पर स्थानांतरित हो गया। अमित शाह, ये भेदभावपूर्ण और लक्षित डिमोलिशन पूरी तरह से अवैध हैं और इन्हें तुरंत प्रभाव से रोका जाना चाहिए।”
आपको बता दें कि बॉर्डर एरिया में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बायतु से विधायक हरीश चौधरी भी अपना विरोध व्यक्त कर रहे हैं। चौधरी ने कहा है कि दशकों से इन दुर्गम रेगिस्तानी इलाकों में रहने वाले गरीब और ग्रामीण तबके के लोगों के आस्था स्थलों को बिना किसी उचित वैकल्पिक संवाद के इस तरह अचानक ढहाया जाना सामाजिक ताने-बाने और आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंचा सकता है।
इधर, पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने इस ‘ऑपरेशन क्लीन’ का पूरी तरह से खुलकर समर्थन किया है। कैलाश चौधरी का तर्क है कि जब मामला देश की सीमा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो, तो वहां किसी भी प्रकार की तुष्टिकरण की राजनीति या सामाजिक रियायत नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि बॉर्डर के 15 किलोमीटर के दायरे में किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अवैध निर्माण की जांच करना और उसे हटाना सुरक्षा एजेंसियों और जिला प्रशासन का संवैधानिक अधिकार और कर्तव्य है।
















