बीकानेर Abhayindia.com बीकानेर नगर निगम चुनाव-2026 को लेकर कांग्रेस और भाजपा ने 80 में से अधिकांश वार्डों में अपने प्रत्याशियों को सिंबल दे दिए है। अब सिर्फ उन वार्डों पर पेच फंसा हुआ है जहां विवाद की स्थिति ज्यादा बनी हुई है। हालांकि, दोनों ही पार्टियों ने अभी तक आधिकारिक तौर पर सूचियां जारी नहीं की है। पार्टियों की ओर से सीधे प्रत्याशी को ही टिकट मिलने की सूचना दी गई है। ऐसे में जिन दावेदारों को ऐसी सूचना नहीं मिली वे असमंजस में है।
माना जा रहा है कि ऐसे दावेदार सोमवार को बागी के तौर पर नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं। आपको बता दें कि सोमवार को नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख है। अभी तक गिने-चुने प्रत्याशियों ने ही नामांकन दाखिल किए है। अधिकांश प्रत्याशी सोमवार को ही नामांकन भरने जाएंगे। इस दौरान उनका मुकाबला बागियों से भी हो सकता है।
आपको यह भी बता दें कि टिकट वितरण की प्रक्रिया शुक्रवार देर रात से शुरू हो गई थी। शनिवार व रविवार को जिन-जिन दावेदारों के पास टिकट की आधिकारिक सूचना आ गई उन्होंने ढोल ताशों के साथ मैदान में ताल ठोक दी। इसके साथ ही टिकट से वंचित दावेदार भी सड़कों पर उतर आए। कई जगहों पर टायर जला कर विरोध दर्ज कराया जा रहा है। कइयों ने नेताओं के निवास पर दस्तक देकर विरोध दर्ज करा दिया है। जानकारी के अनुसार, करीब 20 से 25 वार्डों में कांग्रेस और भाजपा के असंतुष्ट दावेदार बागी के रूप में मैदान में उतर कर अपनी-अपनी पार्टियों के अधिकृत प्रत्याशियों का चुनावी गणित बिगाड़ सकते हैं। हालांकि, दोनों ही पार्टियों के दिग्गज नेता डैमेज कंट्रोल की कोशिशों में जुट गए हैं, लेकिन रूठे हुए दावेदारों को मनाना उनके लिए आसान नहीं लग रहा।
पार्टियों को सबसे ज्यादा खतरा पूर्व पार्षद और पुराने चुनाव लड़ चुके चेहरों से हो सकता है। इसके अलावा लंबे समय से वार्ड में सक्रिय संगठन कार्यकर्ता, दिग्गज नेताओं के करीबी दावेदार, व्यक्तिगत जनसंपर्क और अपना वोट बैंक रखने वाले दावेदार दोनों ही पार्टियों के लिए चिंता के विषय बने हुए हैं।
खबर है कि दोनों ही पार्टियों ने उन दावेदारों से संवाद करना शुरू कर दिया है जिनको सिंबल नहीं मिला है। निर्दलीय के रूप में नामांकन पत्र भरने से रोकने के लिए समझाइश और समझौतों का दौर शुरू हो गया है। टिकट वितरण के दौरान दोनों दलों के पदाधिकारी सिर्फ प्रत्याशी की जीत की संभावना नहीं देख रहे, बल्कि यह भी गणित लगा रहे हैं कि नाराज कार्यकर्ता किस स्तर तक नुकसान पहुंचा सकता है।
















