Hometrendingडूंगर महाविद्यालय में "विकिरण एवं वातावरण" विषयक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न

डूंगर महाविद्यालय में “विकिरण एवं वातावरण” विषयक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न

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बीकानेर Abhayindia.com हिरोशिमा दिवस के अवसर पर राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर के प्राणिशास्त्र विभाग द्वारा भारतीय विकिरण जीवविज्ञान सोसायटी (Indian Society for Radiation Biology) के तत्वावधान में “विकिरण एवं वातावरण” विषय पर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। सम्मेलन में भारत सहित अमेरिका एवं सिंगापुर के ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिकों ने विकिरण विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण तथा जनस्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि पूर्व महापौर अखिलेश प्रताप सिंह ने बढ़ती विकिरणों के दुष्प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए वैज्ञानिक समुदाय से विकिरण तकनीकों के संतुलित एवं जिम्मेदार उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने हिरोशिमा पर हुए परमाणु हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि मानवता को ऐसे विनाशकारी अनुभवों से सीख लेकर विश्व शांति और सुरक्षित वैज्ञानिक विकास की दिशा में कार्य करना चाहिए। विशिष्ट अतिथि आचार्य तुलसी कैंसर अस्पताल की निदेशक डॉ. नीति शर्मा ने कैंसर के निदान एवं उपचार में विकिरणों की उपयोगिता तथा उनसे जुड़े संभावित दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा में विकिरणों का विवेकपूर्ण उपयोग लाखों रोगियों के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य एवं भारतीय विकिरण जीवविज्ञान सोसायटी के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) राजेन्द्र कुमार पुरोहित ने कहा कि विकिरण दोधारी तलवार के समान हैं, जो उचित उपयोग होने पर वरदान तथा दुरुपयोग होने पर अभिशाप सिद्ध हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि तुलसी, ग्वारपाठा (एलोवेरा), आंवला, सहजन एवं कुटकी जैसी औषधीय वनस्पतियाँ विकिरणों के दुष्प्रभावों को कम करने में सहायक हो सकती हैं तथा इस दिशा में डूंगर महाविद्यालय में निरंतर शोध कार्य किए जा रहे हैं।

सम्मेलन के संयोजक डॉ. आनन्द खत्री ने बताया कि सम्मेलन के दौरान पाँच तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। अमेरिका के डॉ. राव पेपिनेनी ने विकिरणों के दुष्प्रभावों से बचाव के उपायों पर व्याख्यान दिया। नई दिल्ली की डॉ. मधुबाला ने विभिन्न प्रकार के विकिरणों एवं उनके वैज्ञानिक अनुप्रयोगों पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। सिंगापुर के डॉ. प्रकाश हाण्डे ने फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना तथा नागासाकी पर परमाणु हमले के दीर्घकालिक पर्यावरणीय एवं जैविक प्रभावों पर विस्तार से जानकारी दी।

प्राणिशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि ऐसे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को नवीनतम वैज्ञानिक जानकारियों से अवगत कराने का उत्कृष्ट माध्यम हैं। सम्मेलन की समन्वयक प्रो. मनीषा अग्रवाल ने महाविद्यालय में संचालित विकिरण जीवविज्ञान एवं पर्यावरण संबंधी अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी दी। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन प्रो. नरेन्द्र भोजक ने किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक आयोजनों से महाविद्यालय की शोध संस्कृति को सुदृढ़ता मिलती है तथा यूजीसी-नैक मूल्यांकन में भी सकारात्मक योगदान प्राप्त होता है। सम्मेलन के अंत में समन्वयक प्रो. मनीषा अग्रवाल ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए सम्मेलन की सफलता में सहयोग देने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

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