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राजस्‍थान की 9 विधानसभा सीटों ने बदल दिए थे सत्ता के समीकरण, भाजपा-कांग्रेस की इन पर रहेगी खास नजर

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जयपुर (राम शर्मा) Abhayindia.com आगामी राजस्‍थान विधानसभा चुनाव में प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों पर भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजर रहेगी। चुनाव में ये 9 सीटें ऐसी थी जहां हार जीत का अंतर 1000 वोटों से कम था। इससे सत्ता का समीकरण बदल गया था। इन सीटों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के नेता इस बार भी गंभीर हैं। यहां प्रत्याशी चयन को लेकर दोनों ही पार्टियां गहन सर्वे करवा रही है। उसके बाद ही प्रत्याशी फाइनल किए जाएंगे। दोनों ही पार्टियों ने इन सीटों को “सी” ग्रेड में रखा हुआ है यानी थोड़ी सी बिगड़ी गणित में इन सीटों पर हरवा सकती है। यहां इस बार दोनों ही पार्टियां नए प्रत्याशी उतार सकती है।

खास बात यह है कि पिछले चुनाव में भाजपा मात्र आधा प्रतिशत वोटों के चलते सत्ता से बाहर हो गई थी। यानि भाजपा और कांग्रेस के बीच जीत का अंतर बहुत कम था। कम अंतर से जीतने वालों में गहलोत सरकार के अल्पसंख्यक मामलात मंत्री सालेह मोहम्मद भी आते हैं, उनकी पोकरण सीट भी शामिल है जहां से सालेह मोहम्मद मात्र 872 वोटों से जीते थे, वहींं, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार डॉ जितेंद्र सिंह की खेतड़ी सीट भी इसी तरह की निकटतम फाइट की है।

सबसे बड़ी जीत और सबसे कम जीत भीलवाड़ा से : प्रदेश में सबसे बड़ी और सबसे छोटी जीत भीलवाड़ा जिले में दर्ज हुई। सबसे बड़ी जीत भाजपा प्रत्याशी कैलाश मेघवाल ने 74542 मतों के अंतर से दर्ज की थी। वहीं, सबसे छोटी जीत भाजपा के ही आसींद से प्रत्याशी जब्बर सिंह सांखला ने मात्र 154 मतों से प्राप्त की थी। इसके अलावा सीकर की फतेहपुर में 860, जैसलमेर के पोकरण सीट 872, सीकर के दातारामगढ़ में 920, बाड़मेर की सिवाना सीट पर 957, झुंझुनूं की खेतड़ी सीट पर 957, पाली की मारवाड़ जंक्शन सीट पर 251 और हनुमानगढ़ की पीलीबंगा सीट पर हार जीत का अंतर महज 278 वोट का रहा था।

भाजपा को हराने में नोटा की भी थी अहम भूमिका : पिछले विधानसभा चुनाव में नोटा ने भी राज्य में भाजपा को सत्तामुक्त करने में अहम भूमिका निभाई थी। नोटा के वोट ने अनेक उम्मीदवारों का गणित बिगाड़ दिया था। 18 जगह नोटा और रद्द हुए वोट मिलाकर जीत-हार के अंतर से अधिक पहुंच गए थे। राजस्थान में सभी जगह मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया। यह आंकड़ा 4 लाख 67 हजार 785 को छू गया था। वर्ष 2018 के चुनाव में नोटा कुल वोटों का 1.33 प्रतिशत रहा, जबकि कांग्रेस और भाजपा के बीच मतों का अंतर केवल .5 प्रतिशत था। सबसे अधिक 11002 नोटा वोट कुशलगढ़ विधानसभा सीट पर डाले गए, जबकि सबसे कम 392 नोटा वोट सूरजगढ़ विधानसभा क्षेत्र में डाले गए। इसे विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के अंदर खाने उठे तूफान का नतीजा माना गया था।

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