







बीकानेर Abhayindia.com नगर निगम चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल करने के बाद कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मेयर का नाम तय करना है। पार्टी में अभी तक किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पाई है और अंदरखाने अलग-अलग खेमे बंट गए हैं। पूर्व मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने खुद मीडिया से बातचीत में स्वीकारा है कि स्थानीय स्तर पर एक नाम तय नहीं हो पा रहा है। इसलिए अब प्रभारी और पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में जल्द ही रायशुमारी होगी और उसके बाद हाईकमान मेयर के नाम पर मुहर लगाएगा।
मेयर की रेस में 9 दमदार चेहरे, 4 खेमों में बंटी कांग्रेस
सूत्रों के अनुसार, मेयर पद के लिए दावेदारों की लिस्ट लंबी है, लेकिन मुख्य मुकाबला 4 खेमों के बीच है।
1. कल्ला खेमा – अनिल कल्ला को आगे करने की मांग
पूर्व मंत्री डॉ. बीडी कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। इस खेमे का तर्क है कि अनिल कल्ला को मेयर बनाने से ब्राह्मण वोट बैंक मजबूत होगा और इसका सीधा लाभ 2028 के विधानसभा चुनाव में मिलेगा। एक बड़ा पक्ष खुलकर कल्ला परिवार के समर्थन में है।
2. अल्पसंख्यक खेमा- मौका देने की मांग
दूसरे खेमे का तर्क है कि जिलाध्यक्ष पद से हाथ धोने के बाद अल्पसंख्यक वर्ग को अब मेयर पद मिलना चाहिए। इस रेस में पूर्व मेयर मकसूद अहमद और रिकॉर्ड वोटों से लगातार जीतने वाले जावेद पडिहार का नाम जोर-शोर से चल रहा है।
3. वैश्य खेमा - व्यापारी चेहरे की पैरवी
तीसरा खेमा वैश्य समाज से मेयर बनाने की पैरवी कर रहा है। इसमें नवरतन डागा, धर्मवीर नाहटा और दिलीप बांठिया के नाम शामिल हैं।
4. चौथा खेमा - कई दावेदार
इसी क्रम में पंजाबी समाज से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरविंद मिड्ढा के भाई अश्विनी मिड्ढा का नाम भी रेस में है। इसके अलावा मनोज बिश्नोई और चेतना चौधरी के नाम भी चर्चा में हैं।
विधानसभा चुनाव 2028 पर नजर
चर्चा यह है कि कांग्रेस हाईकमान बीकानेर के मेयर का फैसला केवल नगर निगम तक सीमित नहीं रखेगा। वह आगामी विधानसभा चुनावों में जातीय और वर्गीय समीकरणों को देखते हुए ही नाम तय करेगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि रायशुमारी में 42 पार्षद किस एक नाम पर सहमत होते हैं और हाईकमान किस चेहरे पर दांव लगाकर बीकानेर की सियासी तस्वीर तय करता है।







