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टीकाकरण भ्रांतियाँ – तथ्य और मिथक : जानिये- शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल की कलम से

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प्रिय अभिभावकगण,

नमस्कार। मैं डॉ. श्याम अग्रवाल, बीकानेर। पिछले 25 वर्षों से नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य की सेवा में कार्यरत हूँ। रोज़ाना OPD में माताओं-पिताओं के मन में टीकों को लेकर कई शंकाएँ देखता हूँ। आज इस महत्वपूर्ण विषय पर आपसे सीधा संवाद करना चाहता हूँ।

टीके : आधुनिक चिकित्सा
का सबसे बड़ा वरदान

खसरा, पोलियो, काली खाँसी, टिटनेस – ये बीमारियाँ कभी हज़ारों बच्चों की जान ले लेती थीं। आज टीकाकरण की वजह से ये हमारे शहर बीकानेर से लगभग गायब हैं। एक छोटी सी सुई आज आपके बच्चे का बड़ा कल सुरक्षित करती है।

आइए, 5 बड़े मिथक और उनके सच को समझें...

मिथक, सत्य... यह क्यों ज़रूरी है

1. टीके से बीमारी हो जाती है : टीकों में रोगाणु मरे हुए या कमज़ोर होते हैं। ये बीमारी नहीं कर सकते। ये शरीर को बिना बीमार किए रोग से लड़ना सिखाते हैं।

2. बहुत सारे टीके बच्चे पर भारी पड़ते हैं : शिशु का इम्यून सिस्टम बेहद मज़बूत है। वह रोज़ हज़ारों कीटाणुओं से लड़ता है। टीके वैज्ञानिक तरीके से जाँचे गए कॉम्बिनेशन में दिए जाते हैं।

3. टीके से बुखार आना ख़तरनाक है : हल्का बुखार या दर्द होना सामान्य है। यह संकेत है कि शरीर सुरक्षा बना रहा है। ये लक्षण अस्थायी हैं, पर खसरा या निमोनिया जानलेवा हो सकता है।

4. प्राकृतिक इम्यूनिटी बेहतर है : प्राकृतिक संक्रमण से गंभीर जटिलताएँ या मृत्यु तक हो सकती है। टीका बिना जोखिम के सुरक्षा देता है।

5. टीके लेट करवा सकते हैं : देरी करने से बच्चा सबसे नाज़ुक उम्र में असुरक्षित रह जाता है। सही समय पर टीका ही पूर्ण सुरक्षा देता है।

एक बाल रोग विशेषज्ञ 
के नाते मेरे 4 सुझाव...

1. शेड्यूल का पालन करें : राष्ट्रीय टीकाकरण तालिका का अनुसरण करें। बीकानेर के सरकारी व निजी केंद्रों पर सभी टीके उपलब्ध हैं।

2. रिकॉर्ड रखें : टीकाकरण कार्ड संभालकर रखें।

3. 20 मिनट रुकें : टीके के बाद केंद्र पर 20-30 मिनट अवश्य बैठें।

4. शंका हो तो पूछें : WhatsApp फॉरवर्ड पर नहीं, अपने डॉक्टर पर भरोसा करें।

याद रखें : टीके न सिर्फ आपके बच्चे, बल्कि उसके दोस्तों, दादा-दादी और पूरे बीकानेर को सुरक्षित रखते हैं। इसे ‘हर्ड इम्यूनिटी’ कहते हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करें : यदि 102°F से अधिक बुखार, 3 घंटे से ज़्यादा रोना, साँस में तकलीफ़, या दौरे जैसा कोई लक्षण दिखे तो तुरंत अपने शिशु रोग विशेषज्ञ से मिलें।

अंत में बस इतना कहूँगा– “आज की एक छोटी चुभन, कल की बड़ी परेशानी से बचाती है।” टीकाकरण करवाएँ। समय पर करवाएँ। एक स्वस्थ बीकानेर, एक स्वस्थ भारत बनाएँ। आपके किसी भी प्रश्न के लिए मैं सदैव उपलब्ध हूँ। अपने नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र या योग्य शिशु रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। आपका- डॉ. श्याम अग्रवाल, MD Pediatrics

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