






नव संवत्सर पौराणिक मान्यताओं को अनुसार, ब्रह्माजी ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन सृष्टि की रचना की इसलिये इस दिन नए संवत्सर हिन्दू नववर्ष विक्रम सम्वत की शुरूआत होती है। इस वर्ष 19.03.2026 गुरूवार को विक्रम संवत 2083 रौद्र नामक सम्वत प्रारंभ हो रहा है जिसमें बृहस्पति राजा व मंत्री होंगे। सृष्टि के प्रारंभ के समय देवताओं ने आदि शक्ति माता की उपासना की ताकि जगत में रक्षा व संतुलन बना रहे। इसलिये ही चैत्र नवरात्र पर्व में नौ दिनों तक देवी उपासना की जाती है। यह पर्व सृष्टि के प्रारंभ, शक्ति उपासना व मंगल का प्रतीक माना जाता है।
पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ गुरूवार से हो रहा है। देवी भागवत पुराण के अनुसार, गुरूवार के दिन माँ का आगमन पालकी पर होता है। यह देश व समाज में नये परिवर्तन का संकेत देता है। इससे लोगों को धैर्य और सकारात्मक आचरण करने की प्रेरणा मिलती है तथा शुभ फल की प्राप्ति होती है। -पंडित अशोक कुमार ओझा, ज्योतिषाचार्य, चौथाणी ओझाओं का चौक, बीकानेर


