Thursday, June 25, 2026
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पं. बाबूलाल किराडू को इसलिए कहा जाता था ‘ज्योतिष की डिक्‍शनरी…’

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ज्योतिष व कर्मकांड के प्रख्यात विद्वान पंडित बाबूलाल किराडू (शास्त्री जी) का जन्म विक्रम संवत् 1996 आषाढ़ कृष्णा अष्टमी को बीकानेर के प्रसिद्ध पंडित लालचंद किराडू के घर हुआ था। लालचंद किराडू बीकानेर के प्रसिद्ध पंडित अक्षय राम जोशी के शिष्य थे। इनके बड़े पुत्र पंडित पूनम चंद किराडू (उर्फ पंडिया महाराज के नाम से प्रसिद्ध) थे। पंडित बाबूलाल किराडू ने अपने पिताजी एवं बड़े भाईजी से ही ज्योतिष व कर्मकांड का अध्ययन प्राप्त किया था। पंडिया महाराजा शिव भक्त थे, आपको जैसे वाक्य सिद्वी थी आपने पहले ही कह दिया कि – ‘‘आगे चलकर बाबूलाल ज्योतिष में नक्षत्र की तरह चमकेगा इसका पंडितों में नाम होगा’उनकी भविष्यवाणी सिद्ध हुई आपने ज्योतिष के साथ संस्कृत व्याकरण व साहित्य का अध्ययन पंडित चंडी प्रसाद दाधीच से प्राप्त कर ‘शास्त्री’ पदवी से विभूषित हुए। आप शिक्षक पद पर प्रतिष्ठित रहे।

पं. बाबूलाल किराडू ज्योतिष की ब्रह्म-सौर एवं दृक् पक्षीय गणित प्रक्रिया में पूर्ण निष्णात थे। ज्योतिष जगत् में आप हमेशा प्रज्वलित दीपक की तरह दैदीप्यमान रहे और इस कारण आपको ‘‘ज्योतिष की डिक्‍शनरी’की उपमा दे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। आप कर्मकांड एवं ब्रहम पक्ष सिद्धान्त के अनुयायी एवं बेजोड़ विद्वान थे। अल्पायु में ही अपने अग्रज एवं गुरु से ज्योतिष गणित का विशिष्ट ज्ञान प्राप्त कर पंचांग निर्माण करना सीख गए थे, एवं आपके द्वारा श्री गणेश पंचांग निकाला जिस की प्रसिद्धि बीकानेर में नहीं पूरे देश में रही।

पं. किराडू ज्योतिष व कर्मकांड के मूर्धन्य विद्वान् के साथ ही आप यज्ञाचार्य भी थे, आपके आचार्यत्व में अनेक यज्ञ हुए। आप कवि व सामाजिक कार्यों में भी विशेष स्थान रखते थे। आपकी वेशभूषा को देखकर कोई भी यह नहीं कह सकता था कि यही पंडित बाबूलाल जी है जो इतने विद्वान और भारत प्रसिद्ध है। आपने कक्षा दसवीं में एक गणेशजी का भजन बनाया जो अति उत्तम, इसमें आपकी विद्वता झलकती है। अनेक भजन ख्याल व अन्य रचनाओं की आपने रचना की एक-दो उदाहरण दृष्टव्य है :-

गणपति स्तुति…

उमा के लाला वाम सुंडाला निषि दिन मैं ध्याताऽऽऽ

विघ्न हरो गणराज हमारे मंगल के दाता

भादौ शुक्ला चैथ वार बुद्ध शंकर घर अवतार लियो

ब्रह्मा विष्णु देव सभी ने मिलकर के गुणगान कियो

विष्णु के वर देने से सब जग तुमको ध्याताऽऽऽ

विघ्न हरो गणराज हमारे मंगल के दाता।

पुष्टिकर में जात किराडू घर घर में थोने ध्यावे

अन्न धन रा भंडार भरो थोरे चरणों री भक्ति चावें

बाबूलाल (जी) शास्त्री ने भजन बणाया

मंडलि सब मिलकर गावेऽऽऽ

आप में देशभक्ति की भावना होने के कारण पाकिस्तान व चीन के व्यवहार से क्षुब्ध होकर अपने हिय-भावों को इस प्रकार प्रकट किया जो आज भी प्रासंगिक है -:

 ‘‘देश हमारा भारत प्यारा, नहीं लड़ने का काम रे

सुणलो गड़बड़ करने वालों, कर देंगे चक्‍काजाम रे।।’

आप द्वारा रचित गीत जो जन-जन में विख्यात हुआ सन 1980 में डॉ. बी. डी. कल्ला के लिए एक गीत लिखा जो आज भी लोगों की जुबान पर है -:

 ‘बीडी कल्लो, बड़ो है भल्लो, थौंरो ही है टाबरियो…’

आपके यहां लोगों की भारी भीड़ लगी रहती थी। आपके पास छोटे-बड़े राजनेता, प्रसिद्ध डॉक्टर, वकील व बड़े व्यापारी आते थे। जन्मपत्री के आधार पर दिया गया आपके द्वारा फलादेश काफी सटीक होता था। कुंडली व जन्मपत्री हाथ में लेते ही आपके दिमाग में संपूर्ण खाका बैठ जाता था, आप कहते बोलो – क्या पूछना चाहते हो? पूछने पर शास्त्रीजी प्रश्नों का यथा-योग्य जवाब दे देते थे, तथा उपाय ही बता देते थे। आपके अनेक शिष्य रहे हैं। जिन्होंने ज्योतिष शास्त्र व कर्मकांड मे अपना नाम कमा रहे है। पुष्करणा सावे का मुहूर्त निकालने में आप की महती भूमिका रहती थी। अन्य विद्वानों से शास्त्रार्थ के दौरान सटीक व तर्कशील पक्ष रखते थे। पूर्व में पुष्करणा ब्राह्मणों का सावा 4 वर्ष से आता था जिसको लोग ओलंपिक के नाम से जानते था। सावे से पहले कई महिनों पूर्ण तैयारी करनी आरंभ कर देते थे, आपकी ख्याति सर्वत्र व्याप्त थी। आपने-अपने कुल की परंपरा अनुसार अपने पुत्रों परिवार-जनों व कई शिष्यों को ज्योतिष व कर्मकांड का अध्ययन करवाया, आज भी यह परंपरा अक्षुण्ण हैं। आपके पुत्र पंडित राजेंद्र किराडू इसी शृंखला में एक कड़ी है जिन्‍होंने एम.ए. संस्कृत की परीक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की। डॉ. मुकुंद नारायण ने शास्त्रीजी से कहा कि यह आगे जाकर ये (राजेन्द्र) कॉलेज व्याख्याता बन जाएगा। आप इसे ज्योतिष के कार्यों से मुक्त करे, तब शास्त्रीजी ने कहा कि यदि इसे मै नौकरी में भेज दूंगा तो मेरे परिवार की परंपरा मंद पड़ जाएगी। आप सनातन-सिद्धांतवादी, भावुक, सरल-हदयी व स्पष्ट वक्ता थे।

-एडवोकेट सुरेश नारायण पुरोहित पुत्र डॉ. सोमनारायण पुरोहित, मूंधड़ों का चौक, बीकानेर, मोबाइल नं. 8003447745

पंडित थे ऐसे, अब वे यहाँ दिखे कैसे

श्रीमान् थे बहुगुणी, मिलते लाखों में एक ऐसे

बात करते थे, सीधी-सपाट

बुलाने पर आप, आते हड़ाट

लाली जी किराडू, के आप लाल

लग्न के आप पक्‍के, रहते हर हाल

जीवन का लक्ष्य था , प्रचार सनातन

किया ज्योतिष का था, प्रसार पुरातन

राजकीय सेवा का, किया बखूबी निर्वहन

डूंगर पर फैला, आप का यशोगान

शोध-रत रहते, भविष्य का होता भान

स्वयं थे कर्मठ,  धर्म की बजाते बीन

त्रिनेत्र धारी की, भक्ति में रहते लीन

जीवन को किया, सार्थक आप थे महान्

“सोम” का रहा सौभाग्य, मिला आपका सानिध्य

ईश-कृपा की ओर, लगे रहते निर्बाध्य।।

-डॉ. सोम नारायण पुरोहित, मो. 8209928300

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