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बीकानेर में संपन्न हुआ “राष्ट्रीय पोषण महाकुंभ”, विशेषज्ञों ने कहा- सही पोषण ही स्वस्थ बचपन और सशक्त भारत की आधारशिला

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बीकानेर Abhayindia.com बच्चों को कुपोषण से मुक्त कर शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से बीकानेर पीडियाट्रिक सोसाइटी (बीपीएस) की ओर से आयोजित “राष्ट्रीय पोषण महाकुंभ” अत्यंत भव्य, ज्ञानवर्धक एवं ऐतिहासिक आयोजन के रूप में संपन्न हुआ। देश के प्रतिष्ठित बाल रोग विशेषज्ञों और पोषण विशेषज्ञों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यशाला में बाल स्वास्थ्य, संतुलित आहार, स्तनपान, सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता तथा जीवनशैली से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तृत वैज्ञानिक मंथन हुआ। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बाल रोग विशेषज्ञों के माध्यम से समाज में सही पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक जानकारी जन-जन तक पहुंचाना रहा।

इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नीलम मोहन ने अध्यक्षीय उद्बोधन में अपना “ए टू जेड न्यूट्रिशन मॉड्यूल” प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत में बच्चों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी आज भी गंभीर चुनौती बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पोषण की कमी बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र के विकास को भी प्रभावित करती है। यदि देश को स्वस्थ, सक्षम और प्रतिभाशाली युवा पीढ़ी देनी है तो बचपन में संतुलित एवं वैज्ञानिक पोषण सुनिश्चित करना ही सबसे बड़ा निवेश होगा। उन्होंने कहा कि “आज के बच्चे की पोषण आवश्यकता ही कल के भारत की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”

आयोजन सचिव एवं वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) जी.एस. तंवर ने विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि कुपोषण केवल भोजन की कमी नहीं, बल्कि सही पोषण संबंधी जानकारी के अभाव का भी परिणाम है। उन्होंने बताया कि पोषण तत्वों की कमी बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करती है, जिससे वे गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं और पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर बढ़ती है। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राजस्थान सरकार द्वारा संचालित विभिन्न पोषण कार्यक्रम इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। डॉ. तंवर ने स्वस्थ बचपन का स्वर्णिम सूत्र बताते हुए कहा कि “सही समय पर, सही मात्रा में, सही प्रसंस्करण के साथ सही भोजन ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।”

उन्होंने अभिभावकों को विशेष रूप से पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में छिपी ‘हिडन शुगर’ से सावधान रहने की सलाह देते हुए कहा कि अत्यधिक शर्करा, अधिक नमक, संतृप्त वसा तथा अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। उन्होंने प्रत्येक अभिभावक से खाद्य पदार्थ खरीदते समय उसके लेबल पर अंकित पाँच महत्वपूर्ण जानकारियों- शर्करा, प्रोटीन, वसा, रेशा तथा सोडियम को अवश्य पढ़ने का आग्रह किया।

कार्यशाला में राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने
साझा किए वैज्ञानिक अनुभव

डॉ. गौरव गोम्बर ने किशोरावस्था में पोषण पर चर्चा करते हुए बताया कि शाकाहारी भोजन में भी पर्याप्त एवं गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन उपलब्ध है और संतुलित आहार से बच्चों की सभी पोषण आवश्यकताओं की पूर्ति संभव है। डॉ. मोहित वोरा ने हृदय, यकृत, गुर्दा एवं कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रसित बच्चों के लिए विशेष पोषण प्रबंधन पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। डॉ. गौरव यादव ने सभी आयु वर्ग के बच्चों के लिए संतुलित आहार के मूलभूत सिद्धांतों को सरल एवं वैज्ञानिक तरीके से समझाया। डॉ. श्याम अग्रवाल ने नवजात एवं शिशुओं के लिए स्तनपान के महत्व, उसकी वैज्ञानिक उपयोगिता तथा मातृ दुग्ध के दीर्घकालीन लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का सबसे भावुक एवं प्रेरणादायी क्षण तब आया जब बीकानेर के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पी.सी. खत्री एवं डॉ. सी.के. चहार को उनके दीर्घकालीन चिकित्सा योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। दोनों वरिष्ठ चिकित्सकों ने युवा बाल रोग विशेषज्ञों को केवल बेहतर चिकित्सक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील इंसान बनने का संदेश देते हुए मरीजों की देखभाल के साथ स्वयं के स्वास्थ्य एवं मानसिक संतुलन का भी ध्यान रखने की प्रेरणा दी। बीपीएस की अध्यक्ष डॉ. रेनू अग्रवाल एवं आयोजन सचिव प्रो. (डॉ.) जी.एस. तंवर को इस सफल एवं रिकॉर्ड सहभागिता वाली कार्यशाला के लिए बधाई दी गई। डॉ. तंवर ने बीकानेर सहित श्रीगंगानगर, सूरतगढ़, लूणकरनसर, श्रीडूंगरगढ़, रतनगढ़, नोखा, नागौर एवं चूरू से आए सभी बाल रोग विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में डॉ. मुकेश बेनीवाल, डॉ. मदन चौधरी, डॉ. पवन डारा, डॉ. सारिका स्वामी, डॉ. सुभाष, डॉ. अनुभव चौधरी एवं डॉ. सौरभ पुरोहित के विशेष योगदान की सराहना की। ई-पोस्टर प्रतियोगिता में डॉ. विशाल, डॉ. रिद्धि एवं डॉ. साक्षी को विजेता घोषित किया गया। कार्यक्रम के समापन पर सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि सही पोषण ही कुपोषण मुक्त भारत का सबसे प्रभावी समाधान है। अभिभावकों, चिकित्सकों और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी से ही आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

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