








बीकानेर Abhayindia.com अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ ने सेवारत चिकित्सकों का चिकित्सक शिक्षक में समायोजन प्रक्रिया आरम्भ करने के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है।
ज्ञापन में बताया गया है कि राज्य के विभिन्न चिकित्सा महाविधालयों में अध्यापकों के रिक्त पदों पर सेवारत चिकित्सकों की योग्यता एवं अनुभव का उपयोग करते हुए मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षक की कमी दूर करने हेतु सेवारत चिकित्सकों को आवश्यकतानुसार विभिन्न पदों पर समायोजित करने की प्रक्रिया जारी है। जिसका अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ स्वागत करता है। आगे ज्ञापन में कहा गया है कि चिकित्सक शिक्षकों द्वारा अनावश्यक एनएमसी एवं राज्य सरकार द्वारा जनहित में लिये जा रहे निर्णयों का विरोध किया जा रहा है। दूसरी ओर नवीन चिकित्सक महाविद्यालय चिकित्सा शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। वर्तमान में एनएमसी के निरीक्षण दौरान किये जा रहे पदस्थापन का भी ग्रुप-1 चिकित्सकों द्वारा विरोध किया जा रहा है। सेवारत चिकित्सक संघ इन दोहरे मानदण्डों का विरोध करता है।
राजस्थान सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग के राजस्थान चिकित्सा शिक्षा नियम 1962 में संशोधन के द्वारा सेवारत चिकित्सकों के समायोजन हेतु प्रस्ताव, कमेटी के गठन करने पर चिकित्सा मंत्री का पूर्ण समर्थन एवं सहयोग प्रदान करता है। सेवारत चिकित्सकों की योग्यता एवं रोगी सेवा का लम्बा अनुभव स्थानीय आमजन से जुड़ाव प्रशासनिक क्षमताओं का लाभ प्रदेश की जनता को मिल सकेगा। सेवारत चिकित्सकों द्वारा रोगी सेवा एवं अध्यापन का दोहरा लाभ मिलने एवं नवीन भर्ती की आवश्यकता नहीं होने से वित्तीय भार नहीं होगा। यह सम्पूर्ण प्रक्रिया एनएमसी द्वारा निर्धारित की गई है। राज्य के विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालयों सीनियर डेमोस्टेटर को योग्यता एवं आवश्यकता अनुसार सेवारत चिकित्सकों की तर्ज पर चिकित्सा शिक्षकों के पद पर समायोजित किया जा सकेगा जिसका लाभ सीधे आमजन को मिल सकेगा।
ज्ञापन में डॉ. देवेन्द्र चौधरी, डॉ. सी. एस. मोदी ने अवगत कराया गया है कि राज्य के सेवारत चिकित्सकों को डीएसीपी स्कीम के तहत 3 पदोन्नतियों द्वारा अधिकतम 8700 ग्रेड-पे (एल-21 ) देय है किन्तु चिकित्सक शिक्षकों को डीएसीपी स्कीम द्वारा ग्रेड-पे 10000 (एल-24) देय है। सेवारत चिकित्सकों को भी चतुर्थ डीएसीपी ग्रेड-पे 10000 (एल-24) दी जाए और तृतीय डीएसीपी में 18 प्रतिशत की कैपिंग को विलोपित किया जाए। राजस्थान में चिकित्सा विभाग के ग्रुप प्रथम व ग्रुप द्वितीय को मध्यप्रदेश की तरह समायोजित करने हेतु संघ निवेदन करता है। इससे राज्य सरकार को वित्तीय लाभ होगा। उपरोक्त प्रावधानों का राज्य के चिकित्सा शिक्षकों द्वारा अनुचित विरोध किया जा रहा है। इससे चिकित्सा व्यवस्था में व्यवधान होने की संभावना है। अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ चिकित्सा शिक्षकों के अनुचित विरोध करने पर उद्वेलित है व भविष्य में राज्य सरकार व जनहित में आन्दोलन किया जा सकता है।


