








चंद्र ग्रहण 7 सितंबर 2025 को है। भारतीय समय के अनुसार, यह ग्रहण रात 9 बजकर 58 मिनट पर शुरू होगा। इसका समापन देर रात 1 बजकर 26 मिनट पर माना जा रहा है। चंद्र ग्रहण भारत समेत संपूर्ण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, न्यूजीलैंड, पश्चिमी और उत्तरी अमेरिका, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका के पूर्वी क्षेत्रों में दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक काल 7 सितंबर को दोपहर 12:57 बजे से आरंभ होगा और ग्रहण की समाप्ति तक रहेगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ग्रहण के सूतक के समय में भगवान की पूजा नहीं की जाती है। इस दौरान मंदिरों के पट भी बंद रहते हैं। सूतक के दौरान में मंत्रों का मानसिक जप करना चाहिए। यानी मन ही मन मंत्रों का जप करें। मंत्र बोलना नहीं चाहिए। इस समय में दान-पुण्य करना चाहिए। गायों को हरी घास खिलाएं। चंद्र ग्रहण के बाद मंदिरों में सफाई होती है और भक्तों के लिए मंदिर के पट खोले जाते हैं। ग्रहण के अशुभ असर से बचने के लिए हनुमानजी की पूजा, हनुमान चालीसा। भगवान शिव और माता दुर्गा की आराधना करनी चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। सूतक के दौरान कैंची, सुईं व अन्य धारदार वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए। यात्रा से भी बचना चाहिए।ग्रहण को देखना नहीं चाहिए।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, चंद्र ग्रहण शनि की राशि कुंभ और गुरु के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद में लगेगा। इस काल में चंद्रमा कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे, जिसमें राहु पहले से ही स्थित है। ऐसे में कुंभ राशि में ग्रहण के साथ-साथ ‘ग्रहण योग’ का निर्माण भी हो रहा है।


