कोलकाता: विश्व बाजार में जगह बनाता भारत का इस्पात, पढ़ें खास रिपोर्ट….

कोलकाताAbhayindia.com आधुनिक युग में इस्पात आज हर एक आदमी के जीवन की जरुरतों से जुड़ा हुआ है। जीवन व्यवस्था को संचालित करने वाले लगभग हर साधन-श्रम संसाधनों में इस्पात का उपयोग और इसकी उपयोगिता स्पष्ट रुप से दिखाई देती है। भारत के इस्पात बाज़ार का अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार में धीरे -धीरे स्थापित होना, इसी के साथ स्थानीय बाज़ार की जरुरतों के बीच सामंजस्य आखिर कैसे बिठाया जा सकता है,इसे लेकर प्रस्तुत है हमारे विशेष संवाददाता सच्चिदानंद पारीक की एक खास रिपोर्ट….

बिना इस्पात के अधूरा निर्माण…

किसी भी तरह का निर्माण कार्य बिना इस्पात को शामिल किए अधूरा ही दिखता है। कोरोना के कारण बीते साल प्राय: सभी बाजारों में सुस्ती का एक माहौल छाया था, मगर उस दौरान भी इस्पात बाजार ने अपनी सक्रियता पर किसी भी तरह से शिथिलता को हावी नहीं होने दिया था। हालांकि लॉकडाउन में इस्पात बाज़ार भी मंदी से अछूता नहीं रहा। इसके बाद बाज़ार जब फिर से खुले तो अन्य बाज़ारों की तरह इस्पात बाजार ने भी अपने काम- काज को फिर से बढ़ाना शुरु किया। उस समय से इस्पात बाजार में जो तेजी आई वह अभी तक वैसी की वैसी बनी हुई है,हालांकि तेज होते बाज़ार के बीच इस्पात के बढ़ते दामों ने स्थानीय बाजार में खऱीदारों के लिए मुश्किलें खड़ी की है, तो वहीं चीन जैसे देशों से किसी समय इस्पात का आयात करने वाला भारत विश्व बाज़ार में इस्पात के एक बड़े निर्यातक के रुप में भी उभरा है।

वैश्विक महामारी कोविड-19 के भारत में आने के बाद से लेकर अब तक अन्य बाज़ारों की तरह भारत के इस्पात उद्योग ने भी कई तरह की चुनौतियों का सामना किया मगर इन सारी चुनौतियों के बीच उसे और निखरने का अवसर भी मिला, कोरोना के खास प्रभाव वाले समय से लेकर अब तक की इस्पात मार्केट की सक्रियता ने उसके प्रदर्शन को अन्तरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित किया तो दाम के साथ मार्केट में उसके लाभ का प्रतिशत भी पहले से काफ़ी बढ़ गया। दाम बढऩे की वजह से स्थानीय बाजार में पड़ रहे असर के बीच स्थानीय दुकानदारों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत के इस्पात की मांग बढ़ रही है, यह एक अच्छी बात है लेकिन इसके साथ ही उत्पादन कर्ताओं को स्थानीय स्तर पर भी स्थिति को संतुलित बनाए रखना चाहिए।

विकास में रीढ की हड्डी…

देश के सर्वांगीण विकास में भूमिका निभाने वाला इस्पात भारत का इस्पात बाज़ार और उसकी वर्तमान स्थिति आधुनिक सभी उपक्रमों को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले इस्पात को हम किसी भी देश के सर्वांगीण विकास में रीढ़ की हड्डी की उपमा दे सकते है, क्योंकि कृषि हो या उद्योग या फिर रक्षा, तेल, गैस, ऑटोमोबाइल और हाउसिंग सेक्टर में से किसी का भी संचालन बिना इस्पात को शामिल किये नहीं को सकता।

रियल स्टेट उद्योग के संचालन में भी इसी इस्पात की बड़ी भूमिका है। आटोमोबाइल, ब्रिज, रोड स्पोर्ट्स , शिप बिल्डिंग, एग्रीकल्चर, व्हाइट गुड्स , प्रोजेक्ट एयर कंडीशनिंग, इलेक्ट्रिकल ट्रांसमिशन, घरेलू बर्तन और हाउसिंग सेक्टर में इस्पात की एक बड़ी खपत होती है। इंफ्रास्ट्रक्टचर क्षेत्र भी इस्पात के योगदान के बिना अधूरा ही है। रोड, रेल, रक्षा, हाइड्रो प्रोजेक्ट्स, हॉस्पिटल्स में भी इसका योगदान महत्वपूर्ण रुप से दिखता है। कच्चे इस्पात को बनाने में लौह अयस्क और कोकिंग कोल जैसी बुनियादी सामग्रियों की मुख्य रुप से जरुरत होती है। भारतीय इस्पात बाज़ार में तैयार होने वाला माल फ़्लैट स्टील , हॉट रोलैड , कोल्ड रोलैड और गलभाइस्ड कोरयूकेटेड स्टील सहित कई रूपों में दिखता है. इनके उपयोग विभिन्न जगहों पर मांगों के अनुसार होता है।

विश्व में तीसरा स्थान…

कोयला उत्पादन में विश्व में भारत का तीसरा स्थान रखता है। अमेरिका और चीन के बाद भारत कोयला उत्पादन कर्ताओं में तीसरे नंबर पर बड़े उत्पादनकर्ता के तौर पर जाना जाता है। प्राप्त एक जानकारी के अनुसार भारत के पास कच्चे कोयले के कई खदान है और इसके अलावा भी भारत ने कई सारे नये भण्डारणों की खोज भी कर ली है. जिसे देखते हुए यह अनुमान लगाया जाता है कि आने वाले सौ वर्षों तक भारत के पास कच्चे कोयले की किसी तरह से कोई कमी नहीं होगी।

बाजार में स्थापित होने के लिए ऐसी कई विशेषताओं के बावजूद कुछ ऐसे कारण भी है जिसके कारण भारत को कुकिंग कोल के लिए आस्ट्रेलिया, ब्राजील जैसे देशों से आयात पर निर्भर रहना पड़ रहा है.इससे माल की लागत बढ़ जाती है। विशेषज्ञों की माने तो अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कच्चे कोयले का व्यवहार इस्पात के लिए खास तौर सुनिश्चित कर लेना होगा। इसके अलावा भारत में इस्पात की खपत को बढ़ाने पर भी ध्यान देने की जरुरत होगी।

प्रति व्यक्ति इतनी खपत…

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका, यूरोप में लोहे की खपत प्रत्येक व्यक्ति 250 केजी है तो चीन और अन्य देशों में 180 केजी के लगभग है जबकि वहीं भारत में प्रत्येक व्यक्ति सिर्फ 50 किलो ही लोहे की खपत है, बीते साल जो कामकाज प्रभावित हुए, इसी कारण कच्चे माल की कमी हुई जिसके कारण विश्व स्तर पर इस्पात के उत्पादन और बिक्री पर असर पड़ा। लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों के बीच भी बीते साल अक्टूबर माह से भारत में इस्पात बाज़ार फिर से गुलज़ार हो उठा। वैश्विक स्तर पर बनी इस्पात की मांग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के इस्पात बाज़ार को स्थापित किया।. मार्केट के विशेषज्ञों के अनुसार अगले तीन-चार महीने तक ऐसी ही तेजी की उम्मीद है।

दामों में आया उछाल…

बाज़ार में लौहे के दाम बढ़े है। बाजार में आई इस तेजी और बाहरी देशों में लोहे का निर्यात किए जाने से मार्केट से जुड़े बड़े व्यापारी जहां खुश दिखते है, वहीं क्षेत्रीय स्तर पर काम करने वाले लोगों को कहना है बढ़े हुए दामों के साथ बाहर की सप्लाई पर ज़ोर दिए जाने की वजह से स्थानीय स्तर पर काम कम हो पा रहा है, बढ़े हुए दामों की वजह से स्थानीय मार्केट में खरीदारी पर असर पड़ा है। क्षेत्रीय स्तर पर काम करने वाले दुकानदारों और एजेंटों के अनुसार विश्व स्तर पर हम मज़बूत हो रहे है,यह अच्छी बात है पर स्थानीय स्तर पर भी और खास तरीके से ध्यान दिए जाने की दरकार है। दुकानदारोंं के अनुसार बढ़े हुए दामों की वजह से काम करना मुश्किल हो रहा है। इसके लिए जरूरी है कि अन्तरराष्ट्रीय बाजार की तरह स्थानीय बाजार को भी व्यवस्थित रखने के लिए ठोस कार्य योजना बनाई जाए।

इस्पात की सुदृढ़ता…

विश्व स्तर पर भारतीय इस्पात की सुदृढ़ता के साथ संतुलन की चाह ताजा बदलते घटनाक्रम के बीच विश्व भर में भारतीय इस्पात बाजार की स्थिति सुदृढ़ होती जा रही है। पूर्व में चीन जैसे देशों से लोहे का आयात करने वाला भारत वर्तमान समय में एक प्रमुख निर्यातक की भूमिका में उभरा है। बाहरी देशों में इस्पात का निर्यात करने की वजह से यहां के मार्केट में तेजी आई है। बाज़ार में लोहे के दाम बढ़े है।

सरकार से गुहार…

व्यापारियों के अनुसार उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार और स्थानीय बाजार के बीच संतुलन बनाएं रखने के लिए सरकार से आवश्यक कदम उठाने का भी लगाई है। कई नामी कंपनियां बाज़ार की धड़कन, हर जिले से सम्बंध भारतीय इस्पात बाज़ार को सेल, टाटा, जिंदल ग्रुप जैसी नामी कंपनियां संचालित करती है। दिल्ली, दुर्गापुर, बर्नपुर, बोकारो, राउरकेल और जमशेदपुर सहित अन्य जगहों पर इनके कई सारे कारख़ाने है। इसके अलावा बंगाल के जंगलपुर, कुलटा, झारसुखड़ा, डानकुनी आदि स्थानों पर भी इनके कारख़ाने है, जहां से समूचे भारत से लेकर विदेशों तक माल की आपूर्ति की जाती है। बंगाल में इस्पात का बाजार सभी जिलों में फैला है।

बंगाल में यहां प्रसिद्ध…

बड़ाबाजार के नलिनी सेठ रोड इलाक़े की लोहा पट्टी, मानिकतल्ला और चलता बाग़ान के बाजार के साथ बजरंगबली मार्केट पश्चिम बंगाल में लोहे के बाजार के तौर पर ख़ास रुप से जाना जाता है . इसके अलावा बेहाला, टालीगंज से लेकर बंगाल के लगभग सभी जिलों में लोहे का यह बाजार फैला हुआ है।

मित्तल ने की थी शुरुआत..

बंगाल में इस उद्योग का इतिहास पुराना बताया जा रहा है। जानकारों की माने तो यहां के इस्पात बाजार सौ साल से भी ज्यादा पुराने है। बताया जा रहा है कि प्रसिद्ध उद्योगपति लक्ष्मीनिवास मित्तल ने भी अपने व्यवसाय की शुरुआत कभी हावड़ा के बजरंगबली मार्केट से की थी, आज इस्पात उद्योग में उनका व्यवसाय विश्व स्तर पर ऊंचाईयों को छू रहा है। बाजार के जानकार लोगों के अनुसार बाहर राज्यों से खऱीदारी के लिए आने वाले व्यापारी जब हावड़ा उतरते थे, तो उन्हें हावड़ा बंजरंगबली और नलिनी सेठ रोड का लोहा पट्टी बाजार, मानिकतल्ला का लोहा बाज़ार काफ़ी नज़दीक लगता था। जहां खरीदारी करना उनके लिए सहुलियत भरा होता था।

यह बोले व्यापारी…

आवश्यकताओं को पूरा करता बाजार

इस्पात बाजार जीवन से जुड़ी सभी आवश्यकताओं को पूरा करता है। रेलवे की गति भी इससे जुड़ी है,रक्षा विभाग से जुड़े सभी संयत्र इसी इस्पात से तैयार होते है, जीवन व्यवस्था को संचालित करने वाले इन सभी उपक्रमों में इस्पात का यह उपयोग इसकी सार्थकता सहज भाव में सिद्ध कर देती है। यह अच्छी बात है कि भारत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एक मजबूत ईकाई के रुप में खड़ा हो रहा है।
मुरारीलाल माहेश्वरी (उपाध्यक्ष भूषण पॉवर एंड स्टील )

 

आत्मनिर्भरता की तरफ…

कोरोना के आने से कई तरह के नुकसान तो हुुए मगर इसके साथ लोगों ने काफी कुछ नया जाना और सीखा भी, लॉकडॉउन के खुलने के बाद सभी अन्य व्यवसायों की तरह इस्पात बाजार में भी तेजी आई। भारत का इस्पात बाजार अन्तरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित होने की दिशा में अग्रसर है।
-रामकिशन गोयल (व्यवसायी)

 

नियंत्रित रहना जरुरी…

लॉकडॉउन खुल जाने के बाद बाजार में काफी तेजी आई है। कीमतों में चालीस से पचास प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है, मार्केट में इसे लेकर रौनक भी दिख रही है। इससे लोगोंं को फायदा होगा लेकिन कई बाजार इससे प्रभावित भी होंगे। बाजार के स्थायी भविष्य के लिए व्यवस्थित और नियंत्रित रहना पहली जरुरत होगी।
-दिनेश बिहानी (व्यवसायी)

 

सरकार का मिले साथ…

व्यापार से जुड़े लोग अभी राहत महसूस कर रहे है। रिकवरी चरण में अपेक्षाकृत अधिक मांग भी दरों की वृद्धि का एक महत्वपूर्ण कारण है। बदलते माहौल के बीच अन्तरराष्ट्रीय देशों में बढ़ी भारतीय इस्पात की मांग से स्थानीय लोहा- ईकाइयों को लाभ मिला है। इसे कायम रखने के लिए उत्पादन क्षमता को बढ़ाना होगा। सरकार से प्रोत्साहन मिले तो बात बन सकती है।
-प्रदीप जालान (व्यवसायी)

 

स्थानीय दुकानों पर असर…

लॉकडॉउन के बाद खुले बाजार में काफी तेजी और उछाल देखने को मिल रहा है। इस तेजी के पीछे अन्तरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ रही मांगों के साथ कच्चे माल के दामों में बढ़ोत्तरी हुई है, इसके साथ बाजार में होने वाली इसकी कमी भी बताई जा रही है। रियल स्टेट कारोबर के साथ यहां के स्थानीय बाजार पर पड़ा है।
-अशोक जायसवाल (व्यवसायी)

 

यह भी जिम्मेदारी…

लम्बें समय तक कोरोना के प्रभाव में पड़े रहने के बाद भारतीय बाजार फिर से सामान्य होने की दिशा में अग्रसर है। यह एक अच्छा संकेत है कि भारत के स्टील की डिमांड बाहरी देशों में बढ़ी है, लेकिन इससे इससे अलग दूसरा पक्ष यह भी है कि मार्केट के दामों में 40 से लेकर 50 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है। दामों में हुई इस बढ़ोत्तरी का कारण जानकार लोग अन्तरराष्ट्रीय मार्केट में बढ़ी मांग बताते है। दाम बढऩे की वजह से इसका असर पूरे स्थानीय बाजार पर पड़ता दिखाई देता है।
-विमल टिबड़ेवाल ( व्यवसायी )

 

उठाएं प्रभावी कदम…

बाज़ार में तेज़ी आई है, पर देखा जाए तो बाज़ार में बने अभी के माहौल के अनुसार ट्रेडर्स लाभ में दिखते है। सामान्य बाज़ार में काम काफ़ी धीमा हो रहा है। बढ़े हुए दामों के कारण बिक्री पर भी असर पड़ा है। स्थानीय बाज़ारों से खऱीदारी करने वाले लोग सिर्फ़ जरुरत के लायक़ ही समान खऱीदना ज़्यादा मुनासिब समझ रहे है। सरकार को भी चाहिए कि वे इसे नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
-श्रीनारायण सादानी, एजेन्ट

 

पहले घर की देखें…

व्यापारिक दिशा में सही उन्नति के लिए बहुत जरुरी है कि पहले घर और फिर बाहर की देखें या सोचें तो बेहतर है . दामों में संतुलित बढ़ोतरी से स्थानीय स्तर पर भी बिकवाली तेज रहती, तेज़ी से स्थानीय स्तर पर कामकाज प्रभावित हो रहे हैं ,समझ नहीं आ रहा कि आने वाले दिनों में ऊँट किस करवट बैठेगा।
-विजय दारुका, एजेन्ट

 

जरुरत की आपूर्ति हो…

स्थानीय आपूर्ति के बाद एक्सपोर्ट किया जाना चाहिए। स्थानीय बाजार को जितनी जरुरत है उतनी को पूरा करने का हमारा पहला लक्ष्य होना चाहिए। स्थानीय स्तर पर जरुरतों की पर्याप्त आपूर्ति किए जाने के बाद ही हम सही अर्थों में आत्मनिर्भर बन पाएंगे।
-मनोज कुमार बंसल, एजेन्ट

 

नई संभावनाएं…

बदलते माहौल के बीच भारत के इस्पात बाज़ार ने जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बनाई है और बना रहा है यह हम सभी के लिए गौरव की बात है। इसीके साथ हमारी जिम्मेवारी भी बढ़ी है कि हम बाजार को किस तरह की सूझ बूझ का इस्तेमाल करते हुए संतुलित रख पाते है।
-मुकेश कुमार जिन्दल

Edited: By Ramesh Bissa

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