Saturday, May 16, 2026
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कर्नाटक में बनेगी भाजपा की सरकार, भाव 45 पैसे!

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बेंगलुरू/नई दिल्ली (अभय इंडिया न्यूज)। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब शनिवार को कर्नाटक में सरकार किसकी बनती है, इसे लेकर सियासी संग्राम तेज हो गया है। इस बीच सट्टा बाजार भी गर्म है। बाजार की मानें तो कनार्टक में भाजपा के सरकार बनाने के आसार सबसे ज्यादा है। भाजपा के भाव 45 पैसे है, जबकि कांग्रेस और जेडीएस के भाव 2 रुपए 25 पैसे है। खबरों के मुताबिक कनार्टक में किसकी सरकार बनेगी इसे लेकर सट्टा बाजार में पांच हजार करोड़ रुपए दांव पर लगे हुए हैं। सट्टे बाजार में जिसके भाव कम होते हैं उसकी जीत पक्की मानी जाती है। इस लिहाज सट्टा बाजार सरकार बनाने को लेकर भाजपा की जीत तय है।

इधर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस भले ही सदन के भीतर संख्याबल का दावा कर रही है, लेकिन भाजपा येद्दियुरप्पा के बहुमत साबित करने को लेकर आश्वस्त दिख रही है। भाजपा के कुछ नेता तो सदन में 120 विधायकों के समर्थन हासिल करने का भी दावा कर रहे हैं, लेकिन भाजपा के बड़े रणनीतिकारों की माने तो येद्दियुरप्पा को सदन के भीतर बहुमत के लिए जरूरी से तीन-चार अधिक विधायकों का समर्थन हासिल होगा। फिलहाल 221 विधायकों के विधानसभा में बहुमत के लिए 111 का आंकड़ा चाहिए। भाजपा को जरूरत सात विधायकों की है। सूत्रों के मुताबिक कुछ विधायक समर्थन में वोट कर सकते हैं, जबकि कुछ मतदान से बाहर भी रह सकते हैं।

जावड़ेकर ने जताया विश्वास

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस के नेताओं की खुशी के इजहार के बीच सबसे पहली प्रतिक्रिया कर्नाटक के भाजपा चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर की ओर से आई। जावड़ेकर ने बहुमत को लेकर विश्वास जताया। इसके बाद येद्दयुरप्पा की करीबी सांसद और भाजपा की प्रदेश महासचिव शोभा करांदलजे ने 120 विधायकों का समर्थन हासिल होने का दावा किया, जो विधानसभा के भीतर भी दिखेगा।

स्थिति साफ नहीं

समर्थन के लिए जरूर विधायक कहां से आएंगे, यह अभी तक साफ नहीं है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इसका खुलासा शनिवार को सदन के भीतर ही होगा। कांग्रेस के पांच और जेडीएस के दो विधायकों के भाजपा के संपर्क में होने की अटकलें लगाईं जा रही है। चर्चा में कांग्रेस और जेडीएस के लिंगायत विधायकों के पाला बदलने की बात भी है। दोनों दलों के लिंगायत विधायक एक लिंगायत को मुख्यमंत्री बनाने के लिए अपनी सीट गंवाने को भी तैयार होंगे। लेकिन भाजपा नेताओं की माने तो अब बात सिर्फ लिंगायत तक सीमित नहीं है। कांग्रेस और जेडीएस के भीतर ही समझौते के लेकर तीखा विरोध है और दोनों दलों विधायक मौका मिलते ही सदन के भीतर इसका इजहार करने से नहीं चूंकेंगे।

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