








आजकल लोग घरों में बेसमेंट बनवा लेते हैं। कभी उसे बतौर स्टोर रूम या फिर गैराज के रूप में प्रयोग करने के लिए। हालांकि इसके पीछे यह तर्क दिया जाता है कि इससे कम जगह में आसानी से व्यवस्थित रूप में पार्किंग या फिर दूसरी गैर जरूरी वस्तुओं के लिए जगह बन जाती है। लेकिन, वास्तु शास्त्र इसकी पैरवी नहीं करता। उसके अनुसार, सुविधाओं के लिए बनवाया गया बेसमेंट कई तरह की परेशानियां खड़ी करता है। यह सही है आज के समय में जगह की कमी, बढ़ती जनसंख्या और बदलते जीवन-स्तर ने भवन निर्माण के तरीकों में बड़ा बदलाव ला दिया है। अब केवल ऊपर की ओर मंज़िलें बनाना ही समाधान नहीं है, बल्कि नीचे की ओर भी जगह का उपयोग किया जा रहा है। भूमिगत निर्माण- जैसे बेसमेंट, तहखाना या अंडरग्राउंड फ्लोर बहुत अधिक प्रचलन में हैं लेकिन इनका निर्माण हमें वास्तु सम्मत करना चाहिए नहीं तो यह बेवजह ही नुकसान पहुंचा सकते हैं।
आदर्श रूप से भवन में बेसमेंट (तहखाना) का निर्माण कभी भी सम्पूर्ण भूखंड में नहीं करना चाहिए। भवन का उत्तरी और पूर्वी भाग, दक्षिणी एवं पश्चिमी भाग की तुलना में नीचा रहना शुभ माना गया है। इसलिए बेसमेंट का निर्माण हमेशा भवन के उत्तर एवं पूर्व में करना श्रेष्ठ रहता है। अनुभव में आया है कि दक्षिण एवं पश्चिम दिशा में बनाया गया बेसमेंट वहां निवास करने वालों के लिए अत्यंत कष्टदायक हो सकता है। यदि किसी इमारत में पहले से ही दक्षिण-पश्चिम दिशा में बेसमेंट बना हुआ हो, तो उसका उपयोग भारी सामान रख कर किया जा सकता है- इस उपाय से वास्तु दोष तो दूर नहीं होगा लेकिन नाम मात्र तकलीफ़ को कम किया जा सकता है।
सकारात्मक ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए बेसमेंट में सफेद या हल्का गुलाबी रंग का पेंट होना चाहिए। यहां गहरे रंगों के इस्तेमाल से बचना चाहिए। घर में बेसमेंट का प्रयोग आध्यात्मिक रूप से भी किया जा सकता है। यहाँ ध्यान, जप करना उत्तम रहता है, यहां मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में करके बैठना शुभकारी होता है। व्यवसाय के लिहाज से बेसमेंट के दक्षिण पश्चिम (नैऋत्य) दिशा में भारी सामान या मशीनें आदि रखी जानी चाहिए वहीं बेचने के लिए जो सामान रखा जाए उसे बेसमेंट की उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दिशा में रखा जाना चाहिए।
बेसमेंट में चारों दिशाओं में खिड़कियों का होना जरूरी होता है ताकि नेचुरल रोशनी व ऊर्जा का प्रवेश हो सके व नकारात्मक ऊर्जा वहां जमा न हो पाए। बेसमेंट में नियमित तौर पर सफाई करें। जहां तक संभव हो बेसमेंट के मध्य में कोई पिलर या कॉलम नहीं होना चाहिए।
केस स्टडी-1
मैंने एक होटल का निरीक्षण किया। होटल के मालिक को समस्या आ रही थी कि किसी वजह से उस होटल का निर्माण बीच में ही बंद हो गया। ऐसी उनकी स्थिति जीवन में पहली बार हुई थी। उस होटल में यह वास्तु दोष था कि बेसमेंट में बीचों बीच एक पिल्लर था जिसके कारण सारी समस्याएँ आ रही थीं।
केस स्टडी-2
मैंने एक दक्षिण मुखी मकान का अवलोकन किया उन्होंने भी बेसमेंट बना रखा था। उनके घर में वंश वृद्धि की समस्या आ रही थी जिसका कारण था कि उन्होंने घर में बेसमेंट के ऊपर ही रसोई बना ली थी जिसके कारण उनके घर में यह समस्या आ रही थी।
केस स्टडी-3
मैंने एक पूर्व मुखी घर का वास्तु अवलोकन किया। जिसमे घर के साथ व्यापारिक प्रतिष्ठान भी शामिल थे। उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तो थी ही साथ ही यह समस्या थी कि जितना वह लोग मेहनत करते हैं उतना उनको वित्तीय लाभ नहीं मिलता। इसका कारण था कि उनके घर में बेसमेंट अनुचित स्थान पर था। सार यह कि बेसमेंट तमाम तरह की आशंकाओं और डर को जन्म देता है। इससे घर में रहने वाले लोगों के मन में धीरे-धीरे हर बात को लेकर निगेटिविटी बढ़ती ही जाती है। -सुमित व्यास, एम.ए. (हिंदू स्टडीज़), काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी, मोबाइल – 6376188431


