







जयपुर Abhayindia.com राजस्थान में मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपल और हॉस्पिटलों के अधीक्षकों पर निजी प्रैक्टिस बंद करने के आदेशों का विरोध शुरू हो गया है। जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल (एसएमएस) मेडिकल कॉलेज से अटैच विभिन्न अस्पतालों के अधीक्षक सामूहिक तौर पर इस्तीफा लेकर प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी के चैंबर पहुंचे। सभी डॉक्टरों ने यहां आदेशों को एकतरफा करार देते हुए लिखित रूप में अपना विरोध दर्ज कराया और इस्तीफे तथा ज्ञापन प्रिंसिपल को सौंपे।
इस्तीफा सौंपने वालों में जे. के. लोन हॉस्पिटल के आर. एम. सेहरा, सांगानेरी गेट महिला चिकित्सालय की अधीक्षक डॉ. आशा वर्मा, सैटेलाइट हॉस्पिटल सेठी कॉलोनी के डॉ. गोर्वधन मीणा, गणगौरी हॉस्पिटल के डॉ. लिनेश्वर हर्षवर्धन सहित कई अन्य अधीक्षक शामिल रहे। सभी डॉक्टर इसके बाद सामूहिक रूप से स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के आवास पहुंचे और उन्हें भी इस निर्णय के खिलाफ विस्तार से अपनी आपत्तियां सौंपी।
डॉक्टरों ने कहा कि बिना किसी चर्चा और विचार-विमर्श के निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के साथ उनकी हॉस्पिटल वर्किंग को 25 फीसदी तक सीमित करना अनुचित है। अधीक्षकों ने सरकार द्वारा नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु 57 वर्ष तय करने को भी गलत बताया। उनका कहना है कि जब सरकार खुद 62 वर्ष तक प्रिंसिपल और अधीक्षक पद पर बने रहने की अनुमति देती है, तो 58 और 59 साल के वरिष्ठ डॉक्टरों को आवेदन से बाहर करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि इस निर्णय में कई तकनीकी अनियमितताएं हैं और यह क्लिनिकल चिकित्सकों को हाशिए पर धकेलने जैसा है। इससे पहले 11 नवंबर को राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (RMCTA) भी इन आदेशों का विरोध जता चुका है। संगठन ने अधिकतम आयु सीमा को नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों के खिलाफ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी।
स्वास्थ्य मंत्री खींवसर ने डॉक्टरों की आपत्तियां सुनने के बाद आश्वासन दिया कि मामले का समाधान जल्द निकाला जाएगा। उन्होंने इस संबंध में 18 नवंबर को मेडिकल एजुकेशन सचिव के साथ बैठक बुलाने के निर्देश दिए हैं। अब सभी की निगाहें इस बैठक पर टिकी हैं कि सरकार आदेशों पर पुनर्विचार करती है या नहीं।






