












जयपुर Abhayindia.com बीकानेर में खेजड़ी की कटाई रोकने को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आज शाम सदन में अहम घोषणा करते हुए कहा है कि खेजड़ी संरक्षण के लिए सरकार कानून बनाने जा रही है। कानून का मसौदा तैयार हो रहा है। मसौदा तैयार होते ही सदन में विधेयक लाया जाएगा। खेजड़ी हमारा कल्पवृक्ष है और पहचान है। इसे राज्यवृक्ष भी घोषित कर रखा है।
सीएम भजनलाल शर्मा ने राज्यपाल के अभिभाषण पर जवाब देते समय कहा कि हम प्रकृति को मां मानकर पूजते हैं। नदी-पहाड़-वृक्ष को पूजते हैं। दो साल में 20 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं और पूरे पांच साल के कार्यकाल में पचास करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। हम सभी को प्रकृति के लिए सामूहिक प्रयास करना होगा। कार्बन उत्सर्जन रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। राजस्थान में सौर ऊर्जा के कुल उत्पादन का 27 प्रतिशत उत्पादन हो रहा है। हमें विकास भी करना है और विरासत को भी बचाना है। इसलिए खेजड़ी को बचाने के लिए कानून लाने जा रहे हैं। इस मुद्दे पर मुझसे कुछ समय पहले संत-महात्मा भी मिले थे। उनसे भी मेरी बात हुई थी और आश्वस्त किया था कि खेजड़ी संरक्षण के लिए सरकार काम करेगी।
इधर, बीकानेर में खेजड़ी आंदोलन को लेकर असमजंस की स्थिति बन गई है। राज्य सरकार की ओर से आंदोलन के आज चौथे दिन मंत्री केके बिश्नोई, राज्य मंत्री जसवंत सिंह बिश्नोई, फलौदी विधायक पब्बाराम बिश्नोई, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारीलाल बिश्नोई सहित प्रतिनिधिमंडल बिश्नोई धर्माशाला के पास महापड़ाव स्थल पहुंचा। इस दौरान मंत्री केके बिश्नोई ने कहा कि खेजड़ी की कटाई पर पूर्णतया रोक के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इस बीच, संत समाज की मांग पर प्रदेश में कानून बनने तक बीकानेर और जोधपुर संभाग में खेजड़ी काटने पर रोकने के लिखित आदेश जारी किए जा रहे है। मंत्री बिश्नोई ने इस घोषणा के साथ ही मंच पर मौजूद संतों को पानी पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। इस दौरान जमकर जयकारे भी लगे। लेकिन, जैसे मंत्री बिश्नोई व अन्य जनप्रतिनिधि व साधु संत मंच से जाने लगे तो कई लोगों ने असहमति जताते हुए धरना व आमरण अनशन जारी रखने का ऐलान कर दिया। काफी देर तक इसे लेकर नारेबाजी होती रही। उनका कहना था कि केवल बीकानेर और जोधपुर ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान में खेजड़ी की कटाई पर आज से ही प्रतिबंध लगना चाहिए। साथ ही जहां भी खेजड़ी का एक पेड़ पर कटे तो क्षेत्र के जिम्मेदार कर्मचारियों और उच्च अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। इस तरह से पर्यावरण प्रेमी अब भरी महापड़ाव स्थल पर डटे हुए हैं। ऐसे में आंदोलन को लेकर एकबारगी असमंजस की स्थिति बन गई है।
आपको बता दें कि आज महापड़ाव का चौथा दिन और अनशन का तीसरा दिन है। करीब 500 पर्यावरण प्रेमी अन्न और जल त्यागकर खेजड़ी के लिए कठोर और प्रभावी कानून की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि हमें हमारी खेजड़ी के संरक्षण के लिए कानून चाहिए। स्थिति को देखते हुए कलेक्ट्रेट और बिश्नोई धर्मशाला के बाहर करीब डेढ़ हजार पुलिस जवान तैनात किए गए हैं।




