Friday, May 15, 2026
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सद्भावना के बिना किया गया सद्कार्य भी पतन की ओर ले जाता है : भरतशरण

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बीकानेर Abhayindia.com सीताराम भवन में सूरजमल सुरेश कुमार राठी अक्कासर वालों के सौजन्य से आयोजित हो रही आठ दिवसीय श्री भागवत कथा में श्री जानकी महल आश्रम, वृन्दावन से आए महंत भरत शरण महाराज ने कथा के चतुर्थ दिन विदुर-मैत्रेयी संवाद में भगवान श्री नारायण की इच्छा द्वारा परम् पिता ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि व मानव जाति की उत्पत्ति तथा वराह अवतार व कपिल मुनि के अवतार की कथा बताई।

ब्रह्माजी के दाहिने हाथ से मनु व बायें हाथ से शतरूपा की उत्पत्ति व उनकी पाँच संतानों द्वारा मनुष्य जाति आगे बढ़ी।भगवान श्री नारायण के अवतार कपिल मुनि द्वारा अपनी माता देवहूति को ज्ञान देने की कथा, प्रजापति दक्ष, सती व भगवान शिव की कथा सुनाई।

महाराज ने बताया कि माताओं को अपने बच्चो को उसी प्रकार अच्छे संस्कार देने चाहिए जैसे माता सुनिती ने ध्रुव को दिए। ध्रुवजी की कथा से सीख मिलती है कि ‘समझ’ व ‘इच्छा’ में समझदरी का साथ देना चाहिए। श्रीभागवत कथा दोपहर 1 बजे से सायं 5 बजे तक तथा रात्रि 8:30 से 10 बजे तक ‘नानी बाई का मायरा‘ का आयोजन हो रहा है।

रविवार की कथा के अंत में महाराज ने भक्तगणों व समाजसेवियों मूलचंद कोठारी, रामरतन भूतड़ा, देवकिशन चांडक, गोपाल मोहता, मनोज कुमार बजाज, मनीष सुराणा, हुलासचंद भूतड़ा, रामस्वरूप कोठारी, गोपीकिशन पेड़ीवाल, द्वारका प्रसाद राठी, जगदीश डूडी, बृजमोहन चांडक को अपर्णा पहनाकर आशीर्वाद प्रदान किया। कथा के अंत में महा आरती में सत्यनारायण, अमरचंद, माणकचंद, बजरंगलाल, महावीर प्रसाद, रामावतार, राधेश्याम, जयदयाल, रामकरण बजाज, रेंवतमल बजाज, सुशील मूंदड़ा इत्यादि ने भाग लिया तथा मंच संचालन श्याम सुंदर करनाणी ने किया।

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