बीकानेर Abhayindia.com राष्ट्रीय पशु आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएजीआर), करनाल और वेटरनरी विश्वविद्यालय बीकानेर देशी गौवंशीय पशुओं में आनुवांशिक आधार पर दुग्ध उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए मिलकर कार्य करेंगे।
वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा की अध्यक्षता में सोमवार को हुई एक बैठक में इसके लिए सहयोग और समन्वय पर सहमति बनी। कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि राजस्थान में देश का विख्यात देशी गौवंश बहुतायत में पाया जाता हैं।
विश्वविद्यालय के 8 पशु अनुसंधान केन्द्रों पर देशी गोवंश पर अनुसंधान और विकास कार्य किए जा रहे हैं। राठी, थारपारकर, साहीवाल, कांकरेज, गिर और मालवी देशी गौवंश यहां की हैरिटेज धरोहर है। आनुवांशिकी आधार पर संयुक्त रूप से अध्ययन के नतीजों से पशुओं की उत्पादन क्षमता में अभिवृद्धि की जा सकेगी।
बैठक में राष्ट्रीय पशु आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो करनाल के निदेशक डॉ. आर.के. विज ने कहा कि आनुवांशिकी से देशी गौवंश की उत्पादन क्षमता बढ़ाए जाने की राष्ट्रीय परियोजना पर कार्य हो रहा है। ब्यूरो देशी गौवंश के जीनोटाइप डाटा और नस्लों के सर्वे अध्ययन को वेटरनरी विश्वविद्यालय से साझा कर देशी नस्लों के विकास में अपना अभूतपूर्व योगदान कर सकता हैं।
यह हुए शामिल
बैठक में इसके लिए वेटरनरी विश्वविद्यालय में एक समन्वय केन्द्र बनाने पर सहमति व्यक्त की गई। इस दौरान वेटरनरी कॉलेज के अधिष्ठाता प्रो. आर.के. सिंह, अनुसंधान निदेशक प्रो. हेमंत दाधीच, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. एस.सी. गोस्वामी, प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. आर.के. धूडिय़ा, पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. वी.के. चौधरी और पशु प्रजनन एवं आनुवांशिकी विभाग की प्रो. उर्मिला पन्नू शामिल हुए।
















