






पत्रकारिता के आसमान में “अभय इंडिया” के पंखों को जो ताकत पाठकों ने दी उसी के बूते आज हम सभी को स्थापना के 14वें वर्ष में प्रवेश करने का अवसर मिल रहा है। बीते 13 वर्षों में “अभय इंडिया” के प्रति पाठकों ने जो विश्वास जताया है उसका आभार महज शब्दों से जताना बहुत ही मुश्किल है। वर्ष 1991 में बीकानेर के लोकप्रिय समाचार पत्र दैनिक युगपक्ष से मैंने पत्रकारिता की शुरूआत की थी। उसके बाद दैनिक नवज्योति, दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका में भी रहते हुए पत्रकारिता का अवसर मिला। तब यह अहसास नहीं था कि एक दिन पाठकों की रूचि के अनुसार पत्रकारिता की जिम्मेदारी अकेले के कंधों पर आ जाएगी। लेकिन, अच्छी बात यह रही कि यह जिम्मेदारी कभी भी मेरे लिए बोझ नहीं बनी। इसकी सबसे अहम वजह आरंभ से ही पाठकों का “अभय इंडिया” से अटूट लगाव रहा।
22 जून 2012 को जब “अभय इंडिया” का प्रकाशन शुरू हुआ तो कई चुनौतियां सामने आई। इसकी उम्र ज्यादा नहीं होगी…, ऐसे नकारात्मक शब्द भी सुनने को मिले। लेकिन, पाठकों ने जो गहरा जुड़ाव दिखाया वो अपने आप में एक मिसाल बन गया। उसी ताकत के चलते हमारे पैर कभी डगमगाए नहीं।
“अभय इंडिया” के डिजिटल प्रारूप के आरंभ के समय भी बहुत सी अनपेक्षित बातें सामने आई। इसके बावजूद इस बार भी आखिरकार पाठकों का भरोसा ही जीता। डिजिटल प्रारूप के जरिये अब “अभय इंडिया” की खबरें बीकानेर से बाहर देश-दुनिया तक सहजता से पहुंच रही है। गूगल एनालेटिक्स इसकी गवाही भी देता है। प्रवासियों से मिलने वाला फीडबैक हमेशा ऊर्जा का नया संचार करता है।
असल में, समाचार जगत में कामयाब होने की चुनौती हर दिन मिलती है। इस चुनौती को स्वीकार कर आगे बढने की आदत भी अपने आप पड़ ही जाती है। आमजन के हितों को ध्यान में रखते हुए पत्रकारिता करना आज के दौर में आसान काम नहीं है। सिस्टम की नाराजगी झेलते हुए संघर्ष करते रहने का दृढ़संकल्प पाठकों के प्यार दुलार से ही पूरा हो सकता है। इसके लिए सभी का ह्रदय से आभार व्यक्त करते हैं और उम्मीद करते हैं इसी तरह “अभय इंडिया” हर कसौटी पर खरा उतरे। -सुरेश बोड़ा, संपादक, अभय इंडिया, 9829217604


