बीकानेर पश्चिम विस सीट : 3 बार हारे डॉ. कल्ला कांग्रेस की ताकत या मजबूरी?

Congress Leader Dr BD Kalla
Congress Leader Dr BD Kalla

सुरेश बोड़ा/बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज)। बीते चार दशक से बीकानेर की राजनीति में मजबूत स्तंभ माने जाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. बी.डी. कल्ला आगामी विधानसभा चुनाव में भी बीकानेर पश्चिम विधानसभा सीट से टिकट लेने वालों की पंक्ति में सबसे आगे खड़े हैं। हालांकि वे अब तक के अपने राजनीतिक जीवन में 3 बार चुनाव हार चुके हैं, लेकिन इससे उनकी दावेदारी पर कोई असर नहीं पड़ सका है। बीते दो चुनाव तो वे लगातार हारे हैं। उन्हें दोनों ही चुनाव उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी ने हराए हैं। पिछली बार की तरह इस बार भी डॉ. कल्ला को एक बार फिर से टिकट पाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। उनकी राह में सबसे बड़े कांटे के रूप में पीसीसी सचिव राजकुमार किराड़ू चुभ रहे हैं।

किराड़ू जमीन से जुड़े कार्यकर्ता के रूप में कांग्रेस में अपनी पहचान रखते हैं। बीते छह वर्षों में राहुल गांधी के ड्रीम प्रोजेक्ट राजीव गांधी पंचायत राज प्रकोष्ठ का काम भी बखूबी संभाल रहे हैं। इसी के बूते उक्त प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष मीनाक्षी नटराजन ने किराडृू को राष्ट्रीय महासचिव पद की जिम्मेदारी दी थी। ऐसे में किराड़ू भी बीकानेर पश्चिम विधानसभा सीट के तगड़े दावेदार के रूप में उभर चुके हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो इस सीट के टिकट के लिए कल्ला और किराड़ू के बीच ही जोर-आजमाइश चल रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस पार्टी एक बार फिर लगातार दो बार हुए वरिष्ठ नेता को चुनाव में उतारेगी या फिर पार्टी में धरातल से जुड़े युवा राजकुमार किराड़ू पर दांव लगाना पसंद करेगी। इसके अलावा तीसरे दावेदार के रूप में युवा अरुण व्यास का नाम भी हाईकमान के पास है। संगठन स्तर पर पैनल में भी व्यास का नाम है। व्यास ने यूथ कांग्रेस के नाते भी अपनी दावेदारी पुख्तगी के साथ रखी है। राहुल के युवा विजन पर यदि बात चली तो इस बार इस सीट पर किसी युवा पर भी दांव लग सकता है।

कद्दावर नेता पर आरोप भी

आपको बता दें कि डॉ. कल्ला पहली दफा 1980 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे, इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे लगातार 1985 और 1990 में भी जीते। जब भी जीते तो मंत्रिमंडल में भी शामिल हुए। इससे वे बीकानेर में सबसे ताकतवर बनकर उभरे। इस दरम्यान उन पर एक-एक कर अपने से वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को हाशिये पर डालने के आरोप भी लगने शुरू हो गए।

नंदू महाराज ने चखाया था हार का स्वाद

वर्ष 1993 में एकबारगी कमजोर माने जाने वाले भाजपा के प्रत्याशी नंदलाल व्यास (नंदू महाराज) ने डॉ. कल्ला को पहली बार हार का स्वाद चखाया था। उक्त चुनाव में व्यास 15 हजार से ज्यादा वोटों से जीते थे। इस परिणाम से तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत भी चकित रह गए, और इधर कल्ला को हराने वाले नंदलाल व्यास रातोंरात लोकप्रिय हो गए। जानकार बताते हैं कि उक्त चुनाव में कल्ला विरोधी लॉबी भी पूरी ताकत के साथ खिलाफत में उतर गई थी। खिलाफत की यह छाया वर्ष 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में नजर आई। इसी के चलते कांग्रेस से ही भाजपा में आए डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी ने उन्हें लगातार दो बार चुनाव में हरा दिया।

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