







बीकानेर abhayindia.com कोरोना काल में संगठित गिरोह के रूप में उभरे सूद माफियाओं पर बीकानेर में पुलिस शिकंजा कसेगी। इनकी अपराधिक गतिविधियों की शिकायतें मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक प्रहलाद सिंह कृष्णियां ने जिले की स्पेशल पुलिस टीम को इनकी फेहरिस्त बनाकर कुण्डली तैयार करने में लगा दिया है।
जानकारी के अनुसार जिला पुलिस मुख्यालय को लगातार शिकायतें मिल रही थी कि बीकानेर में सूदखौरों की बड़ी गैंग सक्रिय है, जो डरा-धमकाकर मारपीट और अवैध ब्याज वसूली तक में लिप्त हैं। इस गैंग में शामिल नामी बदमाशों के खौफ से पीडि़त लोग पुलिस में मामला दर्ज कराने से भी घबराते हैं। फिलहाल इन सूदखोरों के अपराधिक कारनामों की सूची बनाई जा रही है। इसके बाद पुलिस इनके खिलाफ कानूनी शिंकजा कसेगी और जिनके अपराधों की फेहरिस्त लंबी होगी उनकी हिस्ट्रीशीट खोली जाएगी।
गौरतलब है कि बीकानेर में सूद माफियाओं की गैंग लंबे समय से सक्रिय है,जो भोले-भाले लोगों को जाल में फांस कर मोटी कमाई कर रहे हैं। मोटे ब्याज पर दिए रुपए वसूलने के लिए सूदखोर हर तरह के हथकंडे अपनाते हैं। ऐसे में जिले में कई परिवार सूदखोरों की भेंट चढ़ चुके हैं। कई लोगों ने थाने में मामले भी दर्ज कराए, लेकिन पुलिस उनके खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं कर पाई।
सरकारी योजनाएं भी है…
जरुतमंदो को आसानी से पैसा दिलाने के लिए कई सरकारी योजनाएं हैं। बैकों से भी लोन लेने की प्रक्रिया सरल कर दी गई है, लेकिन भोले-भाले लोग जरूरत पडऩे पर भारी ब्याज पर रुपए ले लेते हैं। बाद में रुपए चुकता नहीं कर पाने की स्थिति में मकान, जेवरात सब बेचने को मजबूर हो जाते हैं। इतना ही नहीं, इस राशि को चुकाने के लिए फिर ब्याज पर रुपए ले लेते हैं। रुपए लेते समय वे खाली चेक या स्टांप पर हस्ताक्षर भी कर दे देते हैं। बाद में रुपए नहीं चुकाने पर सूदखोर उनके मकान तक हड़प लेते हैं।
पनप रहे सूदखोर…
अनुमान के तौर पर बीकानेर जिले में पांच-छह साल में सूदखोरी का काम करने वाले सैकड़ों लोग पनप गए हैं। इन्होंने साहूकारी एक्ट में किसी तरह का पंजीयन भी नहीं करवाया है। सूद माफिया के कारण कई परिवार बर्बाद हुए हैं। सट्टा कारोबार से जुड़े ज्यादातर युवा ब्याज पर रुपए ले रहे हैं।
पुलिस की कमजोरी का फायदा…
रुपयोंं का लेन-देन और सामान्य ब्याज सिविल अपराध की श्रेणी में आता है। सूद माफिया इसी का फायदा उठा रहे हैं। पीडि़त के रुपए नहीं दे पाने पर उसके खिलाफ चेक अनादरण का दावा कर देते हैं। इस कारण पीडि़त भी डर की वजह से पुलिस के पास न्याय मांगने नहीं जा पाते। कई बार पीडि़त व्यक्ति पुलिस के पास पहुंच जाता है तो बिचौलिए राजीनामा करवा देते हैं। जिला पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सूदखोरी के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन कोई दर्ज नहीं करवाता। जब तक पीडि़त नहीं आएंगे, कार्रवाई कैसे हो पाएगी।
ब्याज की यह दर है…
बाजार में साहूकारा ब्याज ढेड़ से दो रुपए प्रति सैकड़ा है, जो बड़े व्यापारी चंद दिनों के लिए लेते हैं। वहीं सूदखोर ५ से 20 रुपए प्रति सैकड़ा के हिसाब से ब्याज लेते हैं। सूदखोरों ने दिहाड़ी मजदूरों को 10 रुपए प्रति सैकड़ा के हिसाब से रुपए दे रखे हैं, जिनसे वे रोजाना 100 से 500 रुपए तक वसूलते हैं। यदि किसी व्यक्ति ने दस हजार रुपए ब्याज पर लिए हैं तो सूदखोर हजार रुपए पहले काट कर नौ हजार रुपए देते हैं और शेष रकम किस्तों में वसूलते हैं। इसी तरह एक, दो व पांच लाख रुपए देने पर प्रति सैकड़ा पांच से दस रुपए ब्याज लेते हैं।






















