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बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज)। जब सपनों को पूरा करने का हौसला हो तो कोई भी बीमारी, कोई भी बाधा आपको उसे हासिल करने से नहीं रोक सकती और ऐसा ही कुछ कर दिखाया है सिंथेंसिस के होनहार सिंथेंसियन मदन सुथार ने।
मदन का जन्म कोलायत तहसील के सियाणा गांव में हुआ। इनके पिता आशुराम सुथार कारपेंटर है तथा माता कमला देवी एक गृहिणी है। सात भाई-बहनों में एक मदन ने अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने छोटे से गांव के विद्यालय में प्राप्त की। यहां अध्ययन पूरा होने पर वह अपने पिता के साथ बीकानेर आया। बीकानेर में कक्षा आठवीं तक की शिक्षा गणगौर विद्यापीठ, बंगलानगर में प्राप्त की। इसके बाद शहर के विद्यालय बेसिक सीनियर सैकेण्डरी स्कूल से दसवीं कक्षा उतीर्ण करने के साथ ही मदन भविष्य में डॉक्टर बनने के ख्वाब संजोने लगा।
अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उसे अच्छे शिक्षण संस्थान की जरूरत थी। यहां उसकी सहायता उसके ममेरे भाई गौरी शंकर ने बीकानेर के सर्वश्रेष्ठ संस्थान सिंथेसिस के बारे में बताकर की। सिंथेसिस में अपने अध्ययन को जारी रखने के लिए जब मदन ने यहां दाखिला लिया तो सिंथेसिस के विश्वसनीय शिक्षण व्यवस्था से वह बहुत प्रभावित हुआ। यहां के बेहतरीन वातावरण के कारण उसे अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए हौसला मिला। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था, मदन को एक गंभीर बीमारी थी। बीकानेर के लगभग सभी अस्पतालों में इस बीमारी की न तो पहचान हुई और न ही इसका इलाज हो सका। मदन इस बीमारी के बावजूद अपनी लगन से अध्ययन में जुटा रहा तथा अपने लक्ष्य की और निरन्तर अग्रसर रहा।
उसके इस लक्ष्य को पूरा करने में सिंथेसिस संस्थान के गुरूजनों एवं निदेशकों ने अभूतपूर्व सहयोग किया। इस तरह अपने निरन्तर प्रयासों एवं सिंथेसिस के सुदृढ़ मार्गदर्शन द्वारा मदन ने अपने सपनों को उड़ान दी तथा प्रथम प्रयास में ही नीट-2018 में अपने वर्ग में 819वीं रैंक तथा ऑल इण्डिया में 3973 वीं रैंक प्राप्त कर अपना चयन सुनिश्चित करवाया। नीट-2018 की परीक्षा के बाद उसने अपनी गंभीर बीमारी के बारे में सिंथेसिस के निदेशकों से बातचीत कर उचित मार्गदर्शन पाया एवं जयपुर के एसएमएस हॉस्पीटल के डॉ. सुशील तापडिय़ा के माध्यम से मदन की गंभीर बीमारी का पता चला अब वर्तमान में मदन अपनी इस बीमारी का इलाज व्यक्तिगत रूप से डॉ. भूपेन्द्र से करवा रहा है।
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