









बीकानेर Abhayindia.com बीकानेर में नहरबंदी के बाद भी कई क्षेत्रों में उपजे जल संकट के बीच जहां एक ओर आमजनों में आक्रोश उत्पन्न हो रहा है वहीं, जलदाय विभाग भी कम परेशान नजर नहीं आ रहा। सीमित स्टाफ व संसाधनों के चल रहे इस विभाग की सांसें नहरबंदी के दौरान हर बार फूल सी जाती है। इस बार भी ऐसा ही देखने को मिल रहा है। पानी नहीं मिलने से आमजन विभाग के कार्यालय पर धमक कर विरोध प्रदर्शन कर रहा है। कुछ जगह अधिकारियों व कर्मचारियों को कार्यालय से बाहर भी निकाल दिया गया। इसके बावजूद प्रशासन की अनदेखी अचंभित करने वाली है। इस बीच, जलदाय विभाग के कर्मचारियों की ओर से सोशल मीडिया पर एक अपील जारी की गई है।
जलदाय विभाग कर्मचारियों की सभी नागरिकों से विनम्र अपील... पानी की हकीकत!
प्रिय बीकानेरवासियों
आज हमारा पूरा प्रदेश और शहर सूरज की भीषण तपिश से झुलस रहा है। पारा 45℃ के पार जा चुका है, रातें 30℃ पर उबल रही हैं। इस असहनीय माहौल में हर कोई अपने घरों में एसी और कूलर के सहारे राहत ढूंढ रहा है। पानी की मांग इतिहास के सारे रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। लेकिन, इस गर्मी के संकट के बीच, हमें एक कड़वी मगर सच्ची हकीकत को समझना होगा।
1. मशीनें भी थकी हैं, उनकी भी एक सीमा है
जिस तरह हाड़-मांस के बने हम इंसानों की सहने की एक निश्चित क्षमता होती है, ठीक वैसे ही लोहे और तारों से बनी इन मशीनों की भी एक सीमा होती है। 45 डिग्री की झुलसाती गर्मी में ये पम्प हाउस की मोटर बिना रुके, लगातार कार्य कर रही हैं। जब क्षमता से अधिक लोड पड़ता है, तो ये मशीनें भी ‘हांफने’ लगती हैं और आखिरकार दम तोड़ देती हैं। यह समस्या किसी एक मोहल्ले या शहर की नहीं है, बल्कि इस रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी में पूरे देश की है।
2. वो भी किसी के बेटे, किसी के पिता हैं
सोचिए, जब हम अपने घरों में पानी नहीं आने पर छटपटा उठते हैं, तब जल विभाग के कर्मचारी इस जानलेवा धूप में, सड़कों पर, पानी के फॉल्ट वाली लाइन को ठीक कर रहे होते हैं। वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं। उनके शरीर में भी वही खून जो आप के शरीर में है जो इस गर्मी में सूख रहा है। वे अपनी जान जोखिम में डालकर, अपनों को घर पर छोड़कर, सिर्फ इसलिए जूझ रहे हैं ताकि आपके घर तक पानी पहुंचा सके।
3. आक्रोश नहीं, आत्मीयता की ज़रूरत है
पानी की आपूर्ति कम होने पर हमारा गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन उस गुस्से को उन जल कर्मियों पर निकालना जो खुद इस व्यवस्था को सुधारने में दिन-रात एक किए हुए हैं, कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है। वे जादूगर नहीं हैं, वे भी इस व्यवस्था और प्रकृति की मार से जूझ रहे आम इंसान हैं।
एक मार्मिक अपील
जब अगली बार पानी की आपूर्ति कम हो जाए, तो सब्र का दामन थामें। विभाग के कर्मचारियों से विवाद करने के बजाय, उनके प्रति थोड़ी सहानुभूति और आदर रखें। इस अप्रत्याशित संकट के समय में पैनिक (घबराहट) न फैलाएं।
हम क्या कर सकते हैं? (एक ज़िम्मेदार नागरिक का फर्ज़)
* अनावश्यक लोड कम करें जब आपको आपकी जरूरत का पानी प्राप्त हो गया है तो नल तुरंत बंद कर दें।
* गर्मी के समय जब पानी की मांग सबसे ज़्यादा होती है, तब भारी पानी की मोटर पंप, का उपयोग टालें।
* अवैध जल कनेक्शन पुर मोहल्ले पर भारी पड़ते हैं क्योंकि आपका एक गलत कदम पूरे मोहल्ले को प्यासा रख सकता है।
वक्त कठिन है, मौसम बेदर्द है, लेकिन हमारा आपसी तालमेल और धैर्य इस जंग को आसान बना सकता है। जल कर्मियों के हौसले को तोड़िए मत, इस भीषण गर्मी में उनका संबल बनिए! शांति बनाए रखें, ज़िम्मेदारी निभाएं। -समस्त जलदाय कर्मचारी


