Saturday, April 25, 2026
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बीकानेर में खजूर की बहार : 350 हेक्टेयर क्षेत्रफल में हो रही खेती, 54 किस्मों पर चल रहा अनुसन्धान

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बीकानेर Abhayindia.com अखिल भारतीय शुष्क फल अनुसन्धान परियोजना के अंतर्गत सोमवार को एसकेआरएयू स्थित कृषि अनुसंधान केन्द्र बीकानेर में खजूर फल उत्पादन तकनीक पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं आदान वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कुलगुरु डॉ. आरबी दुबे ने कहा कि शुष्क व अर्ध शुष्क जलवायु वाले पश्चिमी राजस्थान मे खजूर की खेती की अपार संभावनाए है। जिले में 350 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खजूर की खेती की जा रही है। विश्ववि‌द्यालय में लम्बे समय से खजूर अनुसन्धान का कार्य चल रहा है वर्तमान में यहां खजूर की 54 किस्मों पर अनुसन्धान किया जा रहा है। विश्ववि‌द्यालय द्वारा खजूर की उत्पादन तकनीक, खाद एवं उर्वरक प्रबंधन, परागण तकनीक, ऑफ़शूट की उत्तरजीविता, रोग एवं कीट प्रबंधन, खजूर के प्रसंस्करण एवं मूल्य सवर्धन पर अनेक तकनीक विकसित की गई है जिसका सीधा लाभ खजूर उत्पादक किसानों को हुआ है। किसान खजूर उत्पादन के तकनीक पक्ष सीखने के लिए विश्वविद्यालय से जुड़ें।

अनुसंधान निदेशक डॉ एनके शर्मा ने कहा कि खजूर उत्पादन के साथ प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर भी विश्वविद्यालय द्वारा कार्य किया जा रहा है। अधिक से अधिक किसान ऐसे प्रशिक्षणों का लाभ लें। खजूर अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ राजेंद्र सिंह राठौड़ ने किसानों को खजूर की विभिन्न किस्मों, खाद व उरर्वक प्रबंधन, परागण तकनीक की जानकारी प्रदान की। निदेशक डीपी एम ई डॉ एस आर यादव ने खारे जल में खजूर की खेती के संबंध में जानकारी दी तथा ऑफ शूट के पौधों की उत्तरजीविता के बारे में बताया। क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ भूपेन्द्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञपित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ बी डी एस नाथावत ने किया ।

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