Friday, June 5, 2026
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बीकानेर में ‘लोक सेवा गारंटी अधिनियम’ बना दिखावा

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बीकानेर abhayindia.com सरकारी विभागों में पदस्थ अधिकारी कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने तथा जनता के काम समय सीमा में करवाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा लागू किया गया लोक सेवा गारंटी अधिनियम बीकानेर जिले में महज दिखावा बन कर रह गया है।

चौकानें वाली बात तो यह है कि ज्यादात्तर लोगों को इस अधिनियम की जानकारी ही हासिल नहीं है, जिसकी मुख्य वजह व्यापक प्रचार-प्रसार का अभाव तथा जिले प्रशासनिक अफसरों द्वारा इसकी समय-समय पर उचित मॉनीटरिंग न करना है।

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यही वजह है कि लंबे समय बाद भी अधिकांश लोगों को यह भी नहीं पता कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम में कौनसी-कौनसी सेवाएं आती हैं जिनका लाभ वे लोक सेवा केंद्र के माध्यम से ले सकते हैं। यही कारण है कि जानकारी के अभाव में लोग सीधे विभागीय कार्यालय जाकर आवेदन दे रहे हैं। जिससे न तो उनका समय पर काम हो पा रहा है और न ही इन लंबित आवेदनों की मॉनीटरिंग शासन स्तर से हो पा रही है। ऐसे में अधिकांश लोग काम न होने के कारण कार्यालय और अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इस तरह की अव्यवस्था से सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है।

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जानकारी के मुताबिक इस समय राजस्थान सरकार  लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से 46 विभागों के अंतर्गत आने वाली 446 सेवाएं देने का दावा कर रही है। लेकिन हकीकत में अधिकांश सेवाएं लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से लोगों को नहीं मिल रही हैं। जबकि लोक सेवा केंद्र के माध्यम से नागरिक विद्युत, नल कनेक्शन, बच्चों को स्कूल में प्रवेश, जन्म, मृत्यु, निवास और विवाह के प्रमाण पत्र, एफआईआर की कॉपी, राशन कार्ड, हैण्डपंप की मरम्मत कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। नियमानुसार इन सभी कामों की समय सीमा निर्धारित है। ऐसा न करने पर न सिर्फ संबंधित अधिकारी कर्मचारी पर जुर्माने का प्रावधान है बल्कि पीडि़त को 250 से 5000 रूपए तक की क्षतिपूर्ति भी देनी होगी।

 

न रुका भ्रष्टाचार और न हो रहे काम
लोक सेवा गारंटी अधिनियम को लागू करने की एक प्रमुख वजह बाबूराज को खत्म कर भ्रष्टाचार को समाप्त करना भी था। लेकिन इसके उचित क्रियान्वयन में जिला प्रशासन के आला अफसरों द्वारा गंभीरता न बरतने के कारण न तो सरकारी विभागीय कार्यालयों से भ्रष्टाचार खत्म हो पाया और न ही जनता के जरूरी काम समय सीमा मेें हो पा रहे हैं। जानकारी में रहे कि लोक सेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन देने का शुल्क निर्धारित है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति अनावश्यक पैसों की मांग नहीं कर सकता है। आवेदनों का निराकरण स्पष्ट व्याख्या के आधार पर ही होता है। समय सीमा में कार्य होने से प्रकरण निश्चित अवधि में ही निराकृत होंगे।
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