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वास्‍तुशास्‍त्र रजिस्‍ट्री नहीं देखता, वो ऊर्जा देखता है…किराये का घर है, तो वास्तु दोष भी किरायेदार पर ही जाएगा?

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ये सवाल हर दूसरे किरायेदार के मन में आता है और जवाब में हम खुद को यही तसल्ली देते हैं – “दोष मकान मालिक का है, हम क्यों भुगतें?” लेकिन, वास्तु शास्त्र, जिसे वेदों ने “जीवन जीने का विज्ञान” कहा है, रजिस्ट्री नहीं देखता। वो ऊर्जा देखता है। वास्तु मूल रूप से 5 तत्वों – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के संतुलन का विज्ञान है। साथ ही ये पृथ्वी की चुम्बकीय ऊर्जा और सूर्य की किरणों की दिशा का अध्ययन है। उत्तर-पूर्व में सुबह की सकारात्मक ऊर्जा आती है। दक्षिण-पश्चिम भार और स्थिरता देता है। अग्नि कोण में रसोई से ऊर्जा का संतुलन बनता है। अब आप सोचिए क्या ये ऊर्जा ये पूछकर आती है कि “मकान आपका है या किराये का?” बिल्कुल नहीं। जिसने भी उस स्पेस में सांस ली, खाना खाया, सोया… ऊर्जा का असर उस पर सीधा पड़ेगा। इस उदाहरण से समझिए- आपने किराये पर कार ली। इंजन में तकनीकी खराबी थी। 100 किमी बाद कार बीच सड़क पर बंद ।परेशान कौन हुआ? आप। मालिक को तो महीने के अंत में किराया ही मिला। ठीक इसी तरह किराये के मकान में वास्तु दोष होने पर “जीवन की गाड़ी” में ब्रेक लगता है। और वो ब्रेक लगता है रहने वाले पर।

अपनी वास्तु विजिट के दौरान जोधपुर में एक मकान देखा पूर्वमुखी मकान। लेकिन उत्तर-पूर्व कटा हुआ, रसोई वास्तु के विपरीत, भूखंड का आकार अनियमित। उत्तर-पूर्व को “ईशान कोण” कहते हैं। यहां हल्कापन और जल तत्व चाहिए। इसके कटने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश रुक जाता है। गलत दिशा की रसोई अग्नि तत्व को असंतुलित करती है। नतीजा यह हुआ इस घर में जितने भी किरायेदार आए, किसी के यहां संतान नहीं हुई। चौंकाने वाली बात – मकान मालिक के घर भी वंश वृद्धि नहीं हुई। क्योंकि दोष जमीन और स्ट्रक्चर का था।

जयपुर के ही मानसरोवर में एक मकान देखा पश्चिममुखी मकान। दक्षिण-पश्चिम में भारी वाटरटैंक, पूर्व में कम खुली जगह, रसोई आग्नेय कोण के बजाय गलत जगह, पश्चिम में खुला स्थान। दक्षिण-पश्चिम “नैऋत्य कोण” है। ये स्थिरता और स्वास्थ्य का जोन है। यहां पानी का भार होने से व्यक्ति का आत्मविश्वास और इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। पूर्व में जगह कम होने से सुबह की विटामिन-D वाली धूप नहीं आती। नतीजा यह हुआ इस घर में रहने वाला एक व्यक्ति, जो हमेशा हंसता-मुस्कुराता था, उसे लकवा हो गया। आज वो अपनी वही हंसी ढूंढ रहा है। वहीं जैसलमेर वास्तु विजिट के दौरान देखा दक्षिण मुखी घर, आग्नेय कोण से प्रवेश द्वार, उत्तर-दक्षिण में रसोई घर, उत्तर-पूर्व में भारी निर्माण साथ ही गंभीर वास्तु दोषयुक्त तहख़ाने। इसका नतीजा यह कि घर के मुखिया की असामयिक मृत्यु तथा घर के लोगों का अनैतिक कार्यों जैसे कि जुआ, सट्टा आदि में संलग्न होना, चरित्र भ्रष्ट होना।

जैसलमेर में ही एक पूर्वमुखी घर, वास्तु सिद्धांतों के अनुसार बना हुआ था। इसका नतीजा यह जब इस घर में किरायेदार ने प्रवेश किया तब उसकी हालत बहुत ख़राब थी, काम काज ठप्प, घर में मांगलिक कार्य नहीं होना। परंतु इस घर में आने के बाद उसके जीवन में फर्श से अर्श जितना परिवर्तन हो गया। उनके सभी रुके हुए काम हो गए और आज तक वे लोग उसी घर में रह रहें हैं। किराए का मकान होने के कारण किरायेदार चाहकर भी मकान में परिवर्तन नहीं करवा पाता यह बिल्कुल सत्य है ऐसे में वास्तु शास्त्र विवेकपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है। जिनमें कुछ सरल उपायों को अपनाकर किरायेदार अपने जीवन को बेहतर बना सकता है।

1. ईशान कोण में यथा संभव तुलसी का पौधा अवश्य लगाएं। यह जीवन को सुखद बनाने सहायक है।

2. ध्यान रखें कि यदि दक्षिण व पश्चिम दिशा में दरवाजें तथा खिड़कियां हो तो उन्हें कम से कम खोलें अतः आवश्यकतानुसार ही खोलें। यहाँ से नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है जिससे कि घर में कलह और बीमारी का प्रकोप बढ़ता है।

3. रसोई घर यदि आग्नेय कोण में नहीं बना हुआ हो तो किसी भी प्रकार से तालमेल बिठाकर जो कमरा आग्नेय कोण में हो उसी कमरे में रसोई बनानी चाहिए।

4. घर में पर्याप्त रोशनी के लिए लाइट्स की व्यवस्था होनी चाहिए।

5. ईशान कोण में भगवान की पूजा करें तथा जल पीने की व्यवस्था भी यहीं रखें।

6. सायं काल में घर में दीया- धूप अवश्य करना चाहिए।

कुछ ऐसे घर जिनमें किराए 
पर भी नहीं रहना चाहिए

1. जिसका उत्तर-पूर्व कटा हुआ हो।

2. उत्तर-दक्षिण में तहख़ाना, जलकुंभी हो।

3. उत्तर-पूर्व में भारी निर्माण किया गया हो।

सच तो ये है कि व्यक्ति किसी मजबूरी में ही किराए के मकान में रहता है। ऐसे में उसकी सबसे बड़ी चाह यही होती है कि कम से कम घर की दीवारें उसके खिलाफ न जाएं। याद रखिए, मकान चाहे ईंट-गारे का अपना हो या किराये का… वहां रहने वाली ऊर्जा आपकी किस्मत जरूर लिखती है। इसलिए दरवाजा किराए का हो तो भी, उसमें घुसने से पहले ऊर्जा अपनी कर लीजिए। क्योंकि घर सिर्फ रहने की जगह नहीं, आपके भविष्य की नींव है। लेखक – सुमित व्यास, एम.ए (हिंदू स्टडीज़), काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी, मोबाइल – 6376188431

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