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यूजीसी के प्रस्‍तावित नियमों के विरोध में करणी सेना ने भरी हुंकार, पुलिस से हुआ सामना, वॉटर कैनन का इस्‍तेमाल

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जयपुर Abhayindia.com विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के प्रस्तावित नियमों के विरोध में को वापस लेने की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की ‘स्वर्ण न्याय यात्रा’ के तहत राजधानी में बड़ा प्रदर्शन किया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना के नेतृत्व में कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक तनातनी रही। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।

आपको बता दें कि यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने करीब 24 दिन पहले इस यात्रा की शुरुआत की थी। वे जयपुर से रवाना होकर बीकानेर के देशनोक स्थित करणी माता मंदिर पहुंचे। वहीं से ‘सवर्ण न्याय यात्रा’ की शुरुआत हुई, जो कई जिलों से गुजरते हुए रविवार को जयपुर पहुंची। प्रदर्शन में सिर्फ जयपुर सहित बल्कि बीकानेर, चूरू, झुंझुनूं, सीकर समेत कई जिलों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। संगठन का कहना है कि यह आंदोलन UGC के नए नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर किया गया है।

सभा को संबोधित करते हुए संगठन से जुड़े युवाओं ने कहा कि उनका आंदोलन किसी जाति या समुदाय के खिलाफ नहीं है। उनका उद्देश्य केवल योग्यता आधारित व्यवस्था और अपने अधिकारों की मांग करना है। इधर, युवाओं ने कहा, ‘हमारी किसी भी जाति या समुदाय से न लड़ाई है, न बैर है, न भेदभाव है। यदि कोई हमारे बराबर खड़ा होता है तो उससे भी हमें कोई आपत्ति नहीं है। हम केवल अपने अधिकार और अपने बच्चों के भविष्य के लिए समान अवसर की मांग कर रहे हैं।’ सभा में मौजूद लोगों ने उच्च शिक्षा में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और किसी भी नीतिगत बदलाव से पहले व्यापक चर्चा करने की भी मांग की। संगठन का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे और व्यापक रूप दिया जाएगा।

यूजीसी के नए नियमों के मुताबिक अब हर कॉलेज में इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC) और इक्वलिटी कमेटी बनानी होगी। अगर किसी छात्र के साथ भेदभाव की शिकायत आती है तो उस पर जल्दी सुनवाई करनी होगी। शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर बैठक होगी, 15 दिन में रिपोर्ट तैयार होगी और उसके बाद कॉलेज प्रशासन को कार्रवाई करनी होगी। अगर कोई कॉलेज इन नियमों का पालन नहीं करता है तो यूजीसी उसकी ग्रांट रोक सकता है, ऑनलाइन और डिस्टेंस कोर्स बंद कर सकता है। गंभीर मामले होने पर कॉलेज की मान्यता भी रद्द की जा सकती है। इन्हीं नियमों को लेकर कई छात्र संगठन और सामाजिक संगठन विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि नियमों में सभी वर्गों को बराबर जगह नहीं दी गई है। साथ ही, अगर कोई झूठी शिकायत करता है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, इसका साफ जिक्र नहीं है। विरोध करने वालों का यह भी कहना है कि इन नियमों की वजह से कॉलेजों पर बेवजह दबाव बढ़ सकता है।

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