आजकल हर व्यक्ति चाहता है कि उसका घर देखते ही बन जाए। नींव की पूजा के साथ ही आर्किटेक्ट से वास्तु अनुसार नक्शा बनवाया जाता है। लोन, बजट, इंटीरियर सब प्लान होता है। लेकिन यहीं एक बहुत बड़ी चूक हो जाती है। घर का नक्शा तो वास्तु के हिसाब से बन जाता है, पर घर का एलिवेशन यानी बाहरी लुक हम पड़ोसी और मैगजीन देखकर बनवा लेते हैं। और यही “सुंदर दिखने वाला एलिवेशन” धीरे-धीरे आपके जीवन में घाटा, बीमारी और क्लेश की वजह बन जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का बाहरी हिस्सा भी उतना ही जरूरी है जितना अंदर का लेआउट। सही दिशा में बना एलिवेशन न सिर्फ घर की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि मानसिक शांति, हवा-रोशनी और प्राकृतिक ऊर्जा से सामंजस्य भी स्थापित करता है। वहीं गलत एलिवेशन बीमारी, व्यापार में घाटा, दुर्घटना और रिश्तों में परेशानी का कारण बन सकता है।एलिवेशन की सबसे संवेदनशील जगह है बालकनी। बालकनी शुद्ध हवा, रोशनी और वेंटिलेशन के लिए जरूरी है। चाय की चुस्कियों से लेकर घर के धुएं के निकास तक, इसकी भूमिका बड़ी है। पर अगर यही बालकनी वास्तु विरुद्ध दिशा में बन जाए तो परेशानी निश्चित है।
एलिवेशन का वास्तु से सीधा कनेक्शन हैं वास्तु शास्त्र सिर्फ कमरे की दिशा नहीं बताता। घर के बाहरी हिस्से को भी प्रकृति की 5 शक्तियों – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश – के साथ बैलेंस करना जरूरी मानता है।
सही एलिवेशन से 3 फायदे सीधे मिलते हैं...
1. हवा और रोशनी- सुबह की धूप और शुद्ध हवा घर में आती है। इससे बीमारी कम होती है।
2. मानसिक शांति – वास्तु अनुसार बना बाहरी हिस्सा दिमाग को सुकून देता है। घर में लड़ाई-झगड़ा कम होता है।
3. आर्थिक उन्नति- ऊर्जा का सही फ्लो व्यापार और नौकरी में तरक्की लाता है।
लेकिन, जब एलिवेशन फैशन के चक्कर में वास्तु विरुद्ध बन जाता है, तो यही ऊर्जा ब्लॉक हो जाती है। नतीजा – काम में अड़चन, स्वास्थ्य खराब और घर में अशांति।
बालकनी : सुंदरता या मुसीबत?
एलिवेशन का सबसे अहम हिस्सा है बालकनी। चाय पीने, हवा लेने, कपड़े सुखाने और घर के धुएं को बाहर निकालने के लिए बालकनी जरूरी है। पर यही बालकनी अगर गलत दिशा में बन गई तो सबसे बड़ा वास्तु दोष बन जाती है। आजकल लोग एलिवेशन को “आकर्षक” दिखाने के लिए चारों तरफ, तीन तरफ या बहुत ज्यादा कटाव वाली बालकनी बनवा देते हैं। ये दिखने में तो अच्छी लगती है, पर वास्तु की दृष्टि से बेहद हानिकारक है।
अपनी वास्तु विजिट के दौरान मैंने कई मकान देखें जिसमें यह गलतियां पाई गई।
केस स्टडी 1 : व्यापार ठप्प
जयपुर में एक घी के व्यापारी का घर देखा। घर का नक्शा ठीक था, पर उनकी बालकनी दक्षिण-पश्चिम दिशा में निकली हुई थी। नतीजा – 2 साल से व्यापार लगातार मंदा। ग्राहक कम, उधारी ज्यादा। जब बालकनी में वास्तु अनुसार बदलाव करवाया गया, तो 6 महीने के अंदर ही उनका काम पटरी पर आ गया। उन्हें खुद भी अप्रत्याशित फायदा दिखा।
केस स्टडी 2 : एक्सीडेंट
नागौर के एक घर में मकान बनने के 8 महीने बाद ही मकान मालिक का बड़ा एक्सीडेंट हो गया। वास्तु विजिट के दौरान जांच करने पर पता चला कि घर में दक्षिण और पश्चिम दोनों तरफ बालकनी थी। ऊपर से दक्षिण वाली बालकनी के ठीक सामने एक बड़ा पीपल का पेड़ था। वास्तु में दक्षिण और पश्चिम को भारी और बंद रखना चाहिए। यहाँ बालकनी और सामने पेड़ ने “नेगेटिव ऊर्जा” को घर में सीधा आने का रास्ता दे दिया।
केस स्टडी 3 : संतान बाधा
एक दंपत्ति 7 साल से शादीशुदा थे, पर संतान नहीं हो रही थी। डॉक्टर ने सब रिपोर्ट नॉर्मल बताई। घर का वास्तु देखा तो पता चला कि बेडरूम के साथ वास्तु विरुद्ध कटाव वाली बालकनी बनी थी। बालकनी हटवाकर दीवार सीधी करवाई। 1 साल बाद उन्हें संतान सुख की प्राप्ति हुई।
ये सिर्फ तीन उदाहरण हैं। ऐसे सैकड़ों केस मिल जाएंगे जहां एलिवेशन की छोटी गलती ने पूरी जिंदगी मुश्किल कर दी।
वास्तु के 3 सुनहरे नियम: एलिवेशन बनवाते समय जरूर ध्यान रखें
अब सवाल है कि समाधान क्या है? क्या सुंदर एलिवेशन बन ही नहीं सकता? बिल्कुल बन सकता है। बस इन 3 नियमों का पालन करें:
नियम 1 : फैशन के चक्कर में ज्यादा कटाव न करें । एलिवेशन को सुंदर दिखाने के लिए गोल, तिरछे और बहुत ज्यादा कटाव न बनवाएं। वास्तु में घर को “चौकोर और स्थिर” माना जाता है। ज्यादा कटाव से ऊर्जा लीक होती है और घर में स्थिरता नहीं रहती। सीधी सादी, बैलेंस्ड बालकनी सबसे अच्छी है।
नियम 2 : बालकनी के लिए उत्तर और पूर्व दिशा सबसे उत्तम अगर आपको घर के चारों तरफ, तीन तरफ या दोनों तरफ बालकनी बनानी है, तो उत्तर और पूर्व दिशा को जरूर शामिल करें। उत्तर दिशा कुबेर की और पूर्व दिशा सूर्य की मानी जाती है। यहाँ से आने वाली रोशनी और हवा घर में धन, स्वास्थ्य और सकारात्मकता लाती है। यहाँ बनी बालकनी वास्तु दोष नहीं, बल्कि वरदान बन जाती है।
नियम 3 : दक्षिण और पश्चिम में बालकनी से बचें, और बाधा हटाएं। दक्षिण और पश्चिम दिशा राहु-शनि की मानी जाती है। इसे भारी और बंद रखना चाहिए।
अगर मजबूरी में यहाँ बालकनी बनानी भी पड़े तो 3 बातों का ध्यान रखें
1. बालकनी का आकार छोटा रखें।
2. बालकनी के सामने कोई बड़ा पेड़, खंभा या ऊंची बिल्डिंग न हो।
3. बालकनी में भारी पौधे और स्टोरेज रखें ताकि वो “भारी” महसूस हो।
घर आपका स्टेटस सिंबल है, इसमें कोई शक नहीं। इसे खूबसूरत बनाइए, लोगों की वाहवाही लूटिए। पर याद रखिए – जो घर अंदर से खुशहाली न दे, वो महल भी कब्रिस्तान जैसा लगता है। वास्तु कोई अंधविश्वास नहीं है। ये प्रकृति और ऊर्जा के विज्ञान का नाम है। एलिवेशन बनवाते समय आर्किटेक्ट के साथ एक बार वास्तु एक्सपर्ट से भी सलाह ले लें। छोटा सा बदलाव लाखों की परेशानी बचा सकता है। आज ही अपने घर का एलिवेशन चेक कीजिए। कहीं आपकी बालकनी दक्षिण-पश्चिम में तो नहीं? कहीं ज्यादा कटाव तो नहीं? अगर हां, तो देर मत कीजिए। समय रहते सुधार कर लेंगे तो घर में सुख, शांति और समृद्धि खुद-ब-खुद आ जाएगी। आखिर में घर सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, ऊर्जा का संगम होता है। लेखक – सुमित व्यास, एम.ए (हिंदू स्टडीज़), काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी, मोबाइल – 6376188431













