








नई दिल्ली Abhayindia.com पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रुझानों के अनुसार, भाजपा 185, टीएमसी 99 और अन्य 6 सीटों पर अपनी अपनी बढ़त बनाए हुए हैं। इस बार चौंकाने वाली बात यह है कि बंगाल की मुस्लिम बहुल सीटों पर भी भाजपा के कई उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। मुर्शिदाबाद की बात करें तो इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से गौरी शंकर घोष 35732 वोटों से आगे चल रहे हैं, जबकिभारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की शाओनी सिंघा रॉय 22183 वोटों से पीछे है।
इसी तरह हबीबपुर की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार जॉयल मुर्मू 28580 वोटों पर बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवारअमल किस्कू 15112 को वोटों का नुकसान दिख रहा है। मानबाजार की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार मयना मुर्मू 14049 वोटों पर बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की उम्मीदवार संध्या रानी टुडू 1343 वोटों से पीछे चल रही हैं।
इधर, अलीपुरद्वार लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र कोमुस्लिम बहुल क्षेत्र माना जाता है। यहां भी भाजपा को बढ़त मिलती दिख रही है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से उम्मीदवार परितोष दास 27075 वोटों से आगे चल रहे हैं, जबकि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार सुमन कांजीलाल को 11563 वोटों का नुकसान हुआ है। मुस्लिम बहुल इलाकों में पार्टी की बढ़त को लेकर नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दक्षिण बंगाल में मुस्लिम वोटों का विभाजन हुआ है, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिल रहा है।
अधिकारी के अनुसार, मुस्लिम बहुल मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में यह बदलाव साफ तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2021 और 2024 के चुनावों में जहां मुस्लिम वोटों का 90–95 प्रतिशत एकतरफा झुकाव सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ओर था, अब उसमें दरार दिखाई दे रही है। आपको यह बता दें कि मुस्लिम बहुल जिलों में भाजपा के इस प्रदर्शन के पीछे मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) भी बड़ा कारण माना जा रहा है। एसआइआर के कारण विशेषकर इन मुस्लिम बहुल जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कटे हैं। जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिलता देख रहा है।


