Saturday, May 16, 2026
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पैसा आता है लेकिन रुकता नहीं? कहीं वास्तु दोष तो नहीं? जानें- ये खास उपाय…

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धन किसी के पास अधिक समय तक नहीं टिकता है क्योंकि सभी की अपनी और अपने घर-परिवार की कुछ जरूरत होती है, जिसके लिए धन खर्च करना पड़ता है। साथ ही बचत करना भी जरूरी है। कई बार तो परिस्थिति ऐसी होती है कि, बचत तो छोड़िए महीना खत्म होने से पहले ही सैलरी खत्म हो जाती है और जेब खाली रह जाती है। यदि वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर या कार्यालय का निर्माण और संचालन किया जाए तो धन की वृद्धि, बचत और समृद्धि स्वतः ही संभव हो जाती है। यदि घर में कमाई तो है लेकिन बरकत नहीं हो रही है, तो इसका कारण वास्तु दोष हो सकता है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार, कुछ विशेष वास्तु दोषों के कारण धन का संचय नहीं हो पाता है और धन अनावश्यक रूप से खर्च होता रहता है। वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को धन की दिशा माना गया है क्योंकि यह कुबेर (धन के देवता) की दिशा है। यदि इस दिशा में कोई दोष है, तो आर्थिक समस्या, अनचाहा खर्च, कर्ज, या धन का नाश हो सकता है। उत्तर दिशा को हमेशा स्वच्छ, हल्की और व्यवस्थित रखें। इस दिशा में भारी वस्तुएँ, कूड़ेदान या गंदे कपड़े रखने से धन संचय में रुकावट आती है। तिजोरी या जहां हम नकद पैसा, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तुएँ रखते हैं, वह स्थान वास्तु शास्त्र के अनुसार अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। तिजोरी को दक्षिण की दीवार के सहारे उत्तर दिशा की ओर खुलने वाला रखें। लॉकर हमेशा भूमि से थोड़ी ऊँचाई पर रखें। इसे फर्श पर सीधा न रखें।तिजोरी के ऊपर कोई भारी वस्तु न रखें। लॉकर में नियमित रूप से लक्ष्मी जी की पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और धन की रक्षा होती है।

धन का आगमन और व्यय मुख्य द्वार से भी जुड़ा होता है। यदि मुख्य द्वार वास्तु सम्मत न हो, तो घर में आए धन की बचत नहीं हो पाती। मुख्य द्वार उत्तर, उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में होना सर्वोत्तम होता है। दरवाज़ा टूटा-फूटा या चरमराने वाला नहीं होना चाहिए। दरवाज़े पर लक्ष्मी जी के चरण चिन्ह या “शुभ-लाभ” का चिन्ह शुभ माना जाता है। दरवाज़े के सामने गड्ढा, खंभा, सूखा पेड़ आदि होने से धन रुकता है। सावधानी रखनी चाहिए कि मुख्य द्वार नैऋत्य में नहीं होना चाहिए।

रसोईघर परिवार की समृद्धि से जुड़ा होता है। यदि रसोईघर वास्तु सम्मत हो तो न केवल भोजन की गुणवत्ता सुधरती है, बल्कि आय और खर्च में संतुलन बना रहता है। रसोईघर दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए क्योंकि यह अग्नि कोण है। रसोईघर में गैस चूल्हा और पानी की व्यवस्था एक-दूसरे से दूर होनी चाहिए। अग्नि और जल का टकराव मानसिक तनाव और आर्थिक खर्च बढ़ाता है।

स्टोरेज में पुराने, बासी, बेकार सामान को न रखें। यह स्थिर ऊर्जा को नष्ट करता है। पानी की टंकी और नाली की दिशा भी आर्थिक प्रवाह को प्रभावित करती है। पानी की ओवरहेड टंकी दक्षिण-पश्चिम दिशा में होनी चाहिए। नाली और पानी के बहाव की दिशा उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। पानी का रिसाव या टपकते नल तुरंत ठीक करवाना चाहिए – यह “धन की हानि” का प्रतीक माना जाता है।

घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है तो मानसिक शांति के साथ-साथ बचत की वृत्ति भी स्वाभाविक बनती है। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में पूजा स्थल होना चाहिए। प्रतिदिन घर में घी या तेल का दीपक जलाना शुभ होता है। घर में सप्ताह में कम से कम एक बार गोबर कंडे और कपूर से वातावरण को शुद्ध करें। साउथ वेस्ट दिशा वाले स्थान को खाली और साफ-सुथरा रखें। यहां रंग भी गहरा नहीं होना चाहिए। पृथ्वी तत्व को मजबूत करने के लिए आप इस जगह पर भारी लकड़ी का फर्नीचर रख सकते हैं। इससे फिजूल खर्चों में कमी आएगी। बेडरूम न केवल आराम का स्थान होता है, बल्कि यह मानसिक संतुलन और आर्थिक निर्णयों से भी जुड़ा होता है।

दंपत्ति का शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम दिशा में हो तो निर्णयों में स्थिरता आती है। बिस्तर के नीचे बेकार, टूटे सामान या पुराने बिल न रखें। यह आर्थिक रुकावट का कारण बन सकता है। बेडरूम में आईना बेड के सामने न हो, यह आर्थिक असंतुलन का संकेत देता है। अगर आईना बेड के सामने हो तो उसे ढक कर रखना चाहिए। अक्सर हमारे हाथ में ऐसे नोट आ जाते हैं जो गले हुए या फटे होते हैं और हम इन्हें पर्स में रखकर भूल जाते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, ऐसे नोट नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं और आर्थिक समृद्धि में रुकावट डाल सकते हैं। इन्हें जल्द से जल्द बैंक में बदलवा लेना ही उचित होता है। कुछ उपाय करके बचत को बढ़ाया जा सकता है जैसे कि नित्य गाय को रोटी देना, यह बहुत ही अचूक उपाय है।

रूपये की बचत केवल कमाई बढ़ाने से नहीं होती, बल्कि सही दिशा, ऊर्जा और मानसिकता के तालमेल से होती है। वास्तु शास्त्र हमें न केवल निर्माण की दिशा दिखाता है, बल्कि जीवन जीने की एक सकारात्मक प्रणाली भी देता है। यदि हम अपने घर और कार्यालय में इन वास्तु नियमों को अपनाएं तो निश्चित ही आर्थिक स्थिति में सुधार होता है, और हम धन को बचा पाने में सक्षम होते हैं। वास्तु के अनुसार जीवन में संतुलन लाकर आप समृद्धि की ओर एक सशक्त कदम उठा सकते हैं। -सुमित व्यास, एम.ए (हिंदू स्टडीज़), काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी, मोबाइल – 6376188431

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