Friday, May 15, 2026
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होली पर लुप्‍त हो रही माला घोलाई की पुरानी परंपरा, जानें- गोबर के कंडे से बनी व मूंज में पिरोई हुई माला का महत्‍व…

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इस वर्ष होलिका दहन 13 मार्च, 2025 गुरुवार को होगा। होलिका दहन से पूर्व बहिनें अपने भाइयों के तिलक कर मुंह मीठा करवा कर उसकी मंगल कामना के लिए गोबर के कंडे से बनी मूंज में पिरोई हुई माला भाई के सिर पर बायीं ओर से दायीं ओर (Anti Clock Wise) घूमा कर फेंक देती है जिससे भाइयों-भाभियों व भतीजों की एरखैर उतर जाती है।फिर वह सब माला सायंकाल जहां होलिका दहन में समर्पित कर दी जाती है।

आजकल कुछ नया करने की होड में बहिनें पुष्पहार/मालाएं भाइयों को पहनाती है जो कि पहले तो उबारने की जगह पहनाना गलत है। इन पुष्प मालाओं को भी लोग होलिका दहन में समर्पित करते है। इन मालाओं में छोटे-छोटे कई जीव होते है, जिनके जलने से हम पाप के भागीदार बनते है। कुछ लोग गोबर की माला को मौली से पिरोकर काम लेते है, वह भी गलत है। इसलिए सभी माताओं व बहिनों से आग्रह करे कि पुष्प माला की जगह सिर्फ गोबर से बनाई व मूंज अथवा जूट से पिरोई माला काम में लेवें। -भैरव रतन बोहरा, ज्‍योतिषाचार्य, बीकानेर 

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