Friday, May 15, 2026
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सरकार की पूंजीपतिपरस्त नीतियों से बैंकों का 13 लाख करोड़ डूबत ऋण : शर्मा

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बीकानेर abhayindia.com राजस्‍थान प्रदेश बैंक एम्पलाॅयज यूनियन, बीकानेर की ओर से ए.आई.बी.ई ए. के आह्वान पर शुक्रवार को बैंक राष्ट्रीयकरण की स्वर्ण जयंति (1969 -2019­) का आयोजन समारोहपूर्वक किया गया। कार्यक्रम में बैंक कर्मचारियों के निजीकरण के विरूद्ध किये गये आंदोलनों का नेतृत्व करने वाले साथी ए. के. घोष, वाई. के. शर्मा (योगी), श्याम खतुरिया एवं विनय के. शर्मा का साफा पहनाकर सम्मान किया गया। बैठक में एम.सी. सोनी, जयशंकर खत्री, अक्षय व्यास व रामदेव राठौड़ ने बैंक राष्ट्रीयकरण पर अपने विचार रखे।

इस अवसर पर वाई.के. शर्मा (योगी) ने राष्ट्रीयकरण के बाद कृषि क्षेत्र में, उद्योगों में बेरोजगार युवाओं को ऋण सुविधा का विस्तृत ब्यौरा दिया। निजी बैंकों के फेल होने की स्थिति में जनता का विश्वास प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीयकरण अत्यन्त आवश्यक व कारगार कदम सिद्ध हुआ जिसमें लगातार बैंकों का लाभ बढा। आज बैंको की जमाऐं 125 लाख करोड़ से अधिक है, जबकि देश में 40 प्रतिशत भाग में ग्रामीण क्षेत्र में बैंक है ही नहीं। इसकी ओर बैंको के बेमेल मर्जर किये जा रहे है। सरकार की पूंजीपतिपरस्त नीतियों के कारण आज 13 लाख करोड़ डूबत ऋण है, और सरकार जानबूझकर ऋण न चुकाने वालों के नाम उजागर नहीं करना चाहती। कार्यक्रम का संचालन सीताराम कच्छावा ने किया।

अर्जन से सृजन की यात्रा ही संकल्प : व्यास

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