पांच वस्तुओं से बनी ये राखी लाती हैं जीवन में सुख और समृद्धि

Vedik Rakhi
Vedik Rakhi

रक्षा बंधन के अवसर पर बहनें अपने लाडले भाइयों के लिए आमतौर पर रेशम डोर से लेकर सोने-चांदी, डायमंड और स्टाइलिश राखियां खरीदती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भाई के लिए एक विशेष प्रकार की राखी अत्यंत शुभ और मंगलकारी मानी गई है। इस राखी को ‘वैदिक राखी’ कहा जाता है। इसे बनाने के लिए एकत्र हर सामग्री का खास महत्व होता है।

इस वैदिक राखी को बांधने पर भाई का जीवन सुखमय और शुभ बनता है। शास्त्रों के अनुसार इसके लिए पांच वस्तुओं का विशेष महत्व होता है, जिनसे रक्षा-सूत्र का निर्माण किया जाता है। इनमें दूर्वा (घास), अक्षत (चावल), केसर, चन्दन और सरसों के दाने शामिल हैं। इन पांच वस्तुओं को रेशम के कपड़े में बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावे में पिरो दें। इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी।

ऐसे बनती हैं वैदिक राखी

सबसे पहले आप पीले, केरिया या लाल रंग का रेशमी कपड़ा लेवें। उसमें 5, 11 या 21 चावल के दाने बांध दें। फिर 11 या 21 दाने राई के बांधें। इसके बाद केसर के सात धागे, दूर्वा की पांच महीन पत्तियां और चंदन के तीन बारीक छिलके या एक चुटकी चंदन का चूर्ण इन सबको अलग-अलग एक ही कपड़े में बांध दीजिए। आप इन्हें संजोने में अपनी रचनात्मकता का भी प्रयोग कर सकती हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पांच प्रकार की सामग्री उतनी ही मात्रा में हो जितनी बताई गई है। इन सबको एक साथ बांध कर इन्हें राखी का रूप दें और डोरी में इस प्रकार पिरोएं कि बांधने में कोई परेशानी नहीं हो। इन्हें इतनी मजबूती से संजोएं कि यह बांधने पर बिखरे नहीं।

ये हैं इन पांच वस्तुओं का महत्व

दूर्वा (घास) : जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेजी से फैलता है और हजारों की संख्या में उग जाता है। उसी प्रकार रक्षा बंधन पर भी कामना की जाती है कि भाई का वंश और उसमें सद्गुणों का विकास तेजी से हो। सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बढ़ती जाए। दूर्वा विघ्नहर्ता गणेशजी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बांध रहे हैं, उनके जीवन में श्री गणेश की कृपा से विघ्नों का नाश हो जाए।

अक्षत (चावल) : हमारी परस्पर एक दूजे के प्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे। यह रिश्ता अखंड बना रहे। चावल को वैसे भी सभी पवित्र चीजों में सबसे अधिक पवित्र माना गया है। यह स्वस्ति मंगल की कामना के लिए एक-दूसरे पर बरसाए जाते हैं।

केसर : केसर की प्रकृति तेज होती है, इसलिए हम जिसे राखी बांध रहे हैं, वह तेजस्वी हो। उनके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो। केशर प्रसन्नता, संपन्नता, ऐश्वर्य, सौभाग्य और वैभव का प्रतीक मानी गई है।

चंदन : जीवन में सुकून ही सबसे बड़ी दौलत है। बहन इसके माध्यम से कामना करती है कि मेरे भाई, भाभी, भतीजे, भतीजी के जीवन में शांति और सुकून बना रहे। उनके पराक्रम की सुगंध चारों तरफ फैले। चंदन की प्रकृति शीतल होती है और यह सुगंध देता है। उसी प्रकार उनके जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो। साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे।

सरसों के दाने : सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है, इसलिए इससे यह संकेत मिलता है कि समाज के दुर्गुणों को, कंटकों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण बनें। सरसो के दाने भाई और परिवार की नजर उतारने और बुरी नजर से भाई व परिवार को बचाने के लिए भी प्रयोग में लाए जाते हैं।

इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई एक राखी को सर्वप्रथम भगवान के चित्र पर अर्पित करें। फिर बहनें अपने भाई को, माता अपने बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ संकल्प करके बांधें। इस प्रकार जो इन पांच वस्तुओं से बनी हुई वैदिक राखी को शास्त्रोक्त नियमों के अनुसार बांधते हैं, वह पुत्र-पौत्र एवं बंधुजनों सहित वर्षभर सुखी रहते हैं।

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