












जयपुर Abhayindia.com बदलते समय की मांग को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग अब करियर मार्गदर्शन को केवल एक औपचारिक गतिविधि नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन निर्माण की सतत प्रक्रिया के रूप में विकसित कर रहा है। स्कूली विद्यार्थियों को सशक्त और सोच-समझकर करियर चुनने में सक्षम बनाने के लिए राज्य में मार्गदर्शन व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के विजन के अनुरूप ‘करियर बनाने से ज्यादा करियर जीने’ की सोच को केंद्र में रखते हुए विभाग ने ठोस कदम बढ़ाए हैं। इसी क्रम में राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् (समग्र शिक्षा अभियान), जयपुर एवं राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (RSCERT), उदयपुर द्वारा यूनिसेफ राजस्थान और अंतरंग फाउंडेशन के तकनीकी सहयोग से आगामी तीन वर्षों के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
इस पहल के अंतर्गत विद्यार्थियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार स्वयं करियर मैपिंग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही विद्यालय स्तर पर करियर काउंसलर की भूमिका को और अधिक सशक्त व प्रभावी बनाया जाएगा। करियर से जुड़ी हाइब्रिड (ब्लेंडेड) सामग्री, डिजिटल प्लेटफॉर्म और व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से मार्गदर्शन को कक्षा की सीमाओं से बाहर तक विस्तार देने की योजना है।
इसके साथ ही शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी और उद्योग जगत के बीच सुदृढ़ समन्वय स्थापित कर ऐसा मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है, जो बच्चों को केवल रोजगार योग्य ही नहीं, बल्कि जीवन के हर पड़ाव पर निर्णायक कदम लेने में सक्षम बनाए।
आसान भाषा में विद्यार्थियों से संवाद और उनके आत्मविश्वास के निर्माण को केंद्र में रखते हुए राज्य स्तरीय कार्यशाला में ‘व्यापक करियर मार्गदर्शन’ विषय पर खुलकर चर्चा हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक (द्वितीय) अशोक कुमार मीणा ने इस बात पर जोर दिया कि करियर का चयन विद्यार्थियों को स्वयं करना चाहिए, ताकि वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सकें।
कार्यशाला में उपायुक्त-द्वितीय (व्यावसायिक शिक्षा) संतोष कुमार मीणा, यूनिसेफ राजस्थान से शिक्षा विशेषज्ञ अमृता सेनगुप्ता, अंतरंग फाउंडेशन से संयुक्त कार्यकारी निदेशक स्वाति मोहन सहित यूनिवर्सिटी दिल्ली, पुणे इंडिया ट्रस्ट, लैंड ए हैड इंडिया, सेंटर ऑफ माइक्रो फाइनेंस, स्माइल फाउंडेशन सहित कॉलेज शिक्षा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित विभिन्न विभागों और संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इनका कहना है...
“बच्चों में विकल्पों की कमी नहीं है, लेकिन उनके लिए कौन-सा विकल्प सही है, यह तय करने के लिए वर्तमान परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सही मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है।” -डालचंद गुप्ता, उप निदेशक, व्यावसायिक शिक्षा।




