एमजीएसयू के स्वयंसेवकों के जाना संग्रहालयों का महत्व, कुलपति सिंह ने कहा- हमारे संग्रहालय हमारी संस्कृति के वाहक 

The importance of museums visited by MGSU volunteers

बीकानेर Abhayindia.com महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (एमजीएसयू) बीकानेर की एनएसएस इकाई की ओर से आज अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर बीकानेर के स्थानीय राजकीय संग्रहालयों में जाकर बीकानेर की धरोहर को जानने का प्रयास किया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि संग्रहालय हमारी संस्कृति के वाहक हैं और इन्हें जानने से आज की युवा पीढ़ी अपने इतिहास से परिचित होगी और अपनी पहचान के साथ उसमें नवीन आत्मशक्ति का संचार होगा जिससे वे देश में अपनी पहचान बना सकेंगे।

इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक और एन एस एस इकाई की प्रभारी डॉक्टर अम्बिका ढाका ने विश्वविद्यालय के इतिहास, विधि, भूगोल, सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग के सौ से अधिक स्वयंसेवकों के साथ राजकीय गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय, बीकानेर का अवलोकन किया। राजकीय संग्रहालय के अधीक्षक महेंद्र निमहाल ने स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन करते हुए संग्रहालय में प्रदर्शित महाराजा गंगा सिंह से संबंधित महत्वपूर्ण जान कारी दी। उन्होंने यहाँ प्रदर्शित पुरावस्तुओं में स्थानीय आभूषण, अस्त्र शास्त्र, औज़ार, लिथोग्राफ, प्राचीन सिक्के, मूर्तिशिल्प आदि पर स्वयंसेवकों को विस्तार से बताया। आज इस अवसर पर संग्रहालय द्वारा लोक कला पर आयोजित प्रदर्शनी का भी अवलोकन स्वयंसेवकों द्वारा किया गया। इस प्रदर्शनी में स्थानीय लोक कला से सम्बंधित जीवन वृत्त, महाराजाओं के वस्त्र, चुग्गा, मेज़ पोश, श्रृंगार सामग्री, धार्मिक जीवन की झांकी आदि की जानकारी प्राप्त की गई।

कार्यक्रम प्रभारी डॉक्टर अम्बिका ढाका ने कहा कि संग्रहालयों की भूमिका और दायित्व राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सन्दर्भ में और भी प्रासंगिक हो जाता है क्यूकि इसमें भाषा, संस्कृति और कला के संवर्धन में संग्रहालयों की भूमिका को विशिष्ट रूप से रेखांकित किया गया है। बाद में स्वयंसेवकों ने बीकानेर के विशिष्ट पहचान के रूप में विश्व विख्यात राजस्थान राज्य अभिलेखागार का भी अवलोकन किया गया। अभिलेखागार में नवनिर्मित संग्रहालय और सुन्दर वीथिकाओं में स्वयंसेवकों ने रिकॉर्ड के डिजिटाइजेशन, माइक्रोफिल्मिंग, फ्यूमिगेशन और रख-रखाव की प्रक्रिया को विस्तार से जाना। इस अवसर पर डॉक्टर मनीष मोदी के मार्गदर्शन में स्वयंसेवकों ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप से संबंधित हल्दीघाटी के युद्ध का सचित्र वृतांत देखा और महाराणा के प्रिय घोड़े चेतक की मृत्यु पर दान दिये गये गांवों के ताम्रपत्र को भी देखा। विश्वविद्यालय के स्वयंसेवकों ने यहाँ फरमान दीर्घा, तेस्सितोरी दीर्घा, स्वतंत्रता सेनानी दीर्घा, ताम्रपत्र दीर्घा, औरंगज़ेब का पंजा, मौलिक पुरंदर की संधि का दस्तावेज़, शिवाजी की जीवनी और रिकॉर्ड सेक्शन का अवलोकन कर अपने ज्ञान में अभिवृद्धि की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक जसप्रीत सिंह, डॉक्टर मुकेश, सुधीर छींपा और सुश्री मेहा ने स्वयंसेवकों के साथ सहभागिता की। स्वयंसेवकों में करण जाखड़, सत्यप्रकाश, कुलदीप सोनी, पद्मा, संगीता, अंकिता, मधुसूदन स्वामी, मैना, सुमन, अशोक, आरती पंचारिया, ने सक्रिय भागीदारी निभाई और विशेषज्ञों से अनेक प्रश्न पूछ कर अपनी जिज्ञासा शांत की। कार्यक्रम के अंत में प्रभारी डॉक्टर अम्बिका ढाका ने सभी को धन्यवाद् ज्ञापित किया और स्वयंसेवकों के उत्साहवर्धन के लिए आभार प्रकट किया।