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बीकानेर में खेजड़ी के मूल्य संवर्धन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

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बीकानेर Abhayindia.com मानव संसाधन विकास अनुभाग, केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान बीकानेर ने नाबार्ड परियोजना के अंतर्गत लाभार्थियों के सुझाव एवं खेजड़ी के मूल्य संवर्धन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ नाबार्ड के अरविंद चाहर, जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम), बीकानेर द्वारा किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने नाबार्ड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को नर्सरी स्थापना एवं बागवानी विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

संस्थान के निदेशक डॉ. जगदीश राणे ने खेजड़ी वृक्ष के माध्यम से शुष्क क्षेत्र को हरा-भरा बनाने तथा किसानों की आय में वृद्धि करने की आवश्यकता पर बल दिया। परियोजना प्रभारी डॉ. डी.के. सरोलिया ने खेजड़ी की नर्सरी उत्पादन तकनीक, कैनोपी प्रबंधन तथा सांगरी के मूल्य संवर्धित उत्पादों पर जानकारी दी। डॉ. एस.के. महेश्वरी ने खेजड़ी में लगने वाले फफूंदजनित रोगों के प्रबंधन पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। मानव संसाधन विकास अनुभाग के प्रभारी रूपचंद बलाई ने भारत सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं के अंतर्गत खेतों में संतुलित उर्वरकों के उपयोग एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की जानकारी साझा की। साथ ही खेत बचाओ अभियान के तहत हरी खाद के उपयोग के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

प्रगतिशील किसान व नर्सरी उद्यमी श्रवण गांव पाल जोधपुर एवं पूनम चंद गांव खारा बीकानेर ने खेजड़ी के बीजों के अंकुरण से देसी पौध संबंधित समस्याओं को साझा किया। मेघ सिंह गांव किसनासर नोखा ने गॉल मिज की समस्या के समाधान के बारे में बताया, जबकि रामेश्वर खिचड़ गांव हिम्मतासर बीकानेर ने विभिन्न आयु के पौधों पर कालिकाएं करने की प्रवर्धन तकनीकों के सफल प्रयोगों के बारे में अपने अनुभव साझा किए।

कृषि विज्ञान केंद्र, झुंझुनूं से उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. राशिद खान ने खेजड़ी में गॉल बनने की समस्या तथा उसके प्रबंधन के संबंध में अपने सुझाव प्रस्तुत किए। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र, पोकरण (जैसलमेर) के प्रभारी डॉ. दशरथ सागर ने गुणवत्तायुक्त पौध प्रवर्धन एवं इसके व्यापक प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को खेजड़ी प्रवर्धन की उन्नत तकनीकों का अवलोकन कराया गया। साथ ही पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलॉजी प्रयोगशाला का भ्रमण करवाया गया तथा खेजड़ी के मूल्य संवर्धित उत्पादों के बारे में जानकारी दी गई।

इस अवसर पर डॉ रामकेश मीणा व डॉ पवन कुमार ने कृषक उद्यमियों के सुझावों को संकलित किया तथा डॉ मनप्रीत कौर ने खेजड़ी के आर्थिक की पहलुओं पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में 14 किसान प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे, जबकि कृषि विज्ञान केंद्र, झुंझुनूं से उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. राशिद खान, कृषि विज्ञान केंद्र, पोकरण (जैसलमेर) के प्रभारी डॉ. दशरथ सागर तथा अन्य किसान ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं संस्थान के निदेशक महोदय द्वारा प्रतिभागि प्रगतिशील उद्यमियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। यह कार्यक्रम खेजड़ी वृक्ष के माध्यम से शुष्क पश्चिमी क्षेत्र को हरित एवं समृद्ध बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल सिद्ध होगा। कार्यक्रम के अंत में डॉ. धुरेंद्र सिंह ने सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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