Friday, April 24, 2026
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परनामी की छुट्टी तय, मेघवाल-चतुर्वेदी-बिड़ला पर टिकी नजरें

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जयपुर (अभय इंडिया न्यूज)। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर प्रदेश भाजपा संगठन में भारी फेरबदल हो सकता है। वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी की छुट्टी होनी जहां तय मानी जा रही है, वहीं नए प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्य के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरूण चतुर्वेदी और सांसद ओम बिड़ला के नामों की चर्चा जोर पकड़ रही है। इनमें से सबसे तगड़े दावेदार अरुण चतुर्वेदी माने जा रहे हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी उनके नाम पर सहमत है। जबकि केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल और सांसद बिड़ला सीएम के विरोधी खेमे के माने जाते हैं।

पार्टी सूत्रों की मानें तो दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट के उप चुनाव के साथ ही स्थानीय निकाय एवं पंचायत राज संस्थाओं के उपचुनाव में भाजपा की हार के पीछे जातिगत समीकरण गड़बड़ होना ही माना जा रहा है। इन चुनाव में भाजपा के परम्परागत वोट बैंक ब्राहम्ण, वैश्य और राजपूत समाज की नाराजगी साफतौर पर देखने को मिल गई थी। ऐसे में अब इन समाजों को पार्टी के साथ फिर से जोडऩे की रणनीति बनाई जा रही है। इसी के तहत वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी को हटाना लगभग तय माना जा रहा है। इसके लिए बाकायदा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और केन्द्रीय नेतृत्व के बीच चर्चा भी हो चुकी है।

प्रदेशाध्यक्ष का पद गंवाने की खबरों के चलते ही परनामी ने इन दिनों खुद को संगठनात्मक गतिविधियों से लगभग दूर कर लिया है। संगठनात्मक कामकाज फिलहाल प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री वी. सतीश और प्रदेश संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर के कंधों पर ही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेशाध्यक्ष के पद के तौर पर अर्जुनराम मेघवाल और ओम बिड़ला की पैरवी राष्ट्रीय नेतृत्व और आरएसएस कर रहा है, लेकिन सीएम की नापसंदगी फिलहाल इनके आड़े आती नजर आ रही है। उधर, अरुण चतुर्वेदी पूर्व में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं, साथ ही उन्हे संघ के स्वयंसेवक के नाते कई सालों तक काम करने का अनुभव भी है। ऐसे में वे भी इस पद के लिए मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति के बाद विभिन्न जिलों में भी संगठन स्तर पर बदलाव किया जाएगा। कई जिलों में शहर और देहात अध्यक्षों को लेकर प्रदेश संगठन को गंभीर शिकायतें मिली है, ऐसे में वहां चुनावों से पूर्व उन्हें हटाने की कार्रवाई हो सकती है।

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