‘गुरुजी’ बोले ‘स्कूल में कक्षाएं नहीं लगती, फिर क्यों बुला रहे हैं?

बीकानेर abhayindia.com प्रदेशभर ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के बाद 24 जून से स्कूल खुल गए हैं। लेकिन फिलहाल बच्चों की पढ़ाई नहीं होती, बच्चों के लिए सरकार ने 31 जुलाई तक फिर से छुट्टियां बढ़ा दी है, लेकिन शिक्षकों को रोजाना स्कूल बुलाया जा रहा है। दूसरी ओर कोरोना-19 का प्रकोप दिनदिनों बढ़ रहा है। इस स्थिति में शिक्षक वर्ग चिन्तित है। शिक्षकों की मंशा है कि सरकार उनसे घर से ही काम कराए।

कहीं संक्रमण नहीं फैल जाए

शिक्षक संगठनों का तर्क है कि जब कक्षाएं लगती ही नहीं है, तो शिक्षकों को स्कूल बुलाने का क्या औचित्य है। लॉकडाउन की परिस्थितियों की तरह ही वर्क फ्रॉर्म होम की व्यवस्था लागू करनी चाहिए। ताकि संक्रमण से बचा जा सके। अभी मुख्यालय से दूर दराज के गांवों की स्कूल में भी शिक्षकों को जाना पड़ रहा है, इसके लिए उन्हें बस व अन्य परिवहन के साधनों से स्कूल पहुंचना पड़ता है। शिक्षकों को आशंका है कि भीड-भाड में कहीं कोरोना की चपेट में ना आ जाए।

सरकार से लगाई गुहार

राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय ने इस संबंध में सरकार से शिक्षकों को स्कूल नहीं बुलाने की गुहार लगाई है। इसके लिए मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया है कि कोरोना के बढते प्रकोप को देखते हुए जुलाई माह में बिना के शिक्षकों को विद्यालयों में उपस्थिति दिए जाने के निर्णय की दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए, अधिकांश सामान्य कार्य शिक्षकों ने पूरे कर दिए है, इसके बाद भी उन्हें स्कूल में उपस्थिति देनी पड़ रही है।  एक तरह से संक्रमण को निमंत्रण देने जैसा ही है।

इन्होंने भी बताया अनुचित

सरकार की इस नीति का शिक्षक नेताओं ने विरोध किया है। राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेशमंत्री रवि आचार्य, शिक्षक नेता सुरेश व्यास, कैलाशदान, राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत के श्रवण पुरोहित, किशोर पुरोहित, अनिल जोशी सहित शिक्षक नेताओं ने वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई है।

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