








बीकानेर Abhayindia.com पीबीएम अस्पताल में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी होती जा रही है। इसके चलते अब यहाँ जांच एजेंसियों का पहरा सख्त हो गया है। करोड़ों रुपये के टेंडर घोटालों और सिंडिकेट की कार्यप्रणाली को लेकर मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के बाद अब एसओजी ने भी अस्पताल में दस्तक दे दी है। चर्चा है कि जल्द ही एसीबी भी इस ‘चक्रव्यूह’ को तोड़ने के लिए बड़ी कार्रवाई कर सकती है। पीबीएम अस्पताल का सिस्टम इन दिनों जनसेवा के बजाय भ्रष्टाचार के एक बड़े सिंडिकेट के कारण सुर्खियों में है।
सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल के कुछ रसूखदार बाबूओं, अधिकारियों और डॉक्टरों ने मिलकर एक ऐसा गठजोड़ बना लिया है, जिसने टेंडर प्रक्रियाओं में जमकर बंदरबांट की है। करोड़ों के टेंडरों में हुई धांधली की फाइलें अब परत-दर-परत खुलने लगी हैं। इस सिंडिकेट का प्रभाव इतना है कि अस्पताल प्रशासन के उच्च पदस्थ अधिकारी भी इनके बिछाए जाल में फंसते नजर आ रहे हैं। भ्रष्टाचार की गूँज जयपुर तक पहुँचने के बाद अब पीबीएम अस्पताल तीन तरफा जांच के घेरे में है। एसओजी की टीम ने भ्रष्टाचार की फाइलों को कब्जे में लेकर गहन छानबीन शुरू कर दी है, जिससे अस्पताल स्टाफ में हड़कंप मचा है। वहींं, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो भी टेंडर घोटालों और अवैध वसूली की शिकायतों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और जल्द ही किसी बड़ी कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि एसपी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और पीबीएम अधीक्षक जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी भी इस सिंडिकेट के चक्रव्यूह से बच नहीं पा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि सिंडिकेट ने अपनी जड़ें इतनी फैला ली हैं कि प्रशासन को भी अंधेरे में रखकर या दबाव में लेकर फाइलों को पास करवाया जा रहा है। अस्पताल जो मरीजों के इलाज के लिए जाना जाता था, वह अब घोटालों का अड्डा बनता जा रहा है। जांच एजेंसियों की सख्ती से कई बड़े नामों का बेनकाब होना लगभग तय माना जा रहा


