हिंदुस्तान की जमीं पर चीते तो आ गए, अब आएंगे बब्‍बर शेर!

नई दिल्‍ली Abhayindia.com प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूनो नेशनल पार्क के बाड़े में 8 चीतों को छोड़ दिया है, चीते अब पिंजरों से निकलकर भारत की धरती पर आ चुके हैं। पीएम मोदी ने इस दौरान खुद फोटो शूट कर चीता सफारी की शुरूआत भी की। आपको बता दें कि कूनो नेशनल पार्क में बब्‍बर शेर भी आ सकते हैं। सीसीएफ उत्तम शर्मा कहते हैं कूनो में सिंह परियोजना बंद नहीं हुई। सहमति बनी तो भविष्य में शेर लाए जा सकते हैं। यदि मप्र को शेर मिले तो दुनिया में हम अकेले प्रदेश होंगे जहां बाघ, तेंदुआ, चीता व शेर होंगे।

बहरहाल, शनिवार को हिंदुस्तान की धरती पर चीतों को छोडऩे के लिए खुद पीएम नरेंद्र मोदी आए, वे स्पेशल विमान से पहले ग्वालियर पहुंचे, जहां से हेलिकॉप्टर से कूनो नेशनल पार्क पहुंचे, उन्होंने पार्क के बाड़े में पिंजरे को खोलकर चीतों को छोड़ा। हिंदुस्तान की जमीं पर चीतों को पुर्नजीवित करने के लिए किए गए इस सहयोग के लिए पीएम मोदी ने मित्र देश नामीबिया को भी बधाई, उन्होंने बताया कि इसके लिए लंबे समय से प्लान पर काम किया जा रहा था, नामीबिया से 5 मादा और करीब 3 नर चीते शनिवार सुबह करीब पौने आठ बजे ग्वालियर पहुंचे, यहां से हेलिकॉप्टर से उन्हें नेशनल पार्क ले जाया गया, इस प्रकार एक साथ चीते और मोदी कूनो नेशनल पार्क पहुंचे, जहां पर चीते छोड़े गए।
सिंह परियोजना को मिली थी मंजूरी…
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कूनो नेशनल पार्क में चीता आ रहा है लेकिन यहां शेर बसाने की तैयारी 30 वर्ष से चल रही है। केंद्र सरकार ने वर्ष 1992 में कूनो नेशनल पार्क में ही सिंह परियोजना को मंजूरी दी थी। भारत में बब्बर शेर सिर्फ गुजरात के गिर नेशनल पार्क में हैं। इसके लिए गुजरात सरकार से अनुबंध हुआ था।
मध्यप्रदेश सरकार ने करीब ढाई सौ करोड़ रुपए खर्च कर सन 2003 में पार्क तैयार कर लिया। फिर गुजरात और केंद्र सरकार से शेर मांगे लेकिन मामला कागजों में अटक गया। इसके बाद आरटीआइ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने अप्रेल 2013 में केंद्र सरकार को छह महीने में गिर से शेरों को कूनो भेजने के आदेश दिए। जब 2014 में भी शेर नहीं पहुंचे तो दुबे ने अवमानना याचिका लगाई। आखिर मार्च 2018 में केंद्र के वकील ने कोर्ट को बताया कि कूनो में जल्द शेर भेजे जा रहे हैं और याचिका समाप्त हो गई। सीसीएफ उत्तम शर्मा कहते हैं कूनो में सिंह परियोजना बंद नहीं हुई। सहमति बनी तो भविष्य में शेर लाए जा सकते हैं। यदि मप्र को शेर मिले तो दुनिया में हम अकेले प्रदेश होंगे जहां बाघ, तेंदुआ, चीता व शेर होंगे।