







बीकानेर Abhayindia.com बीकानेर राजपरिवार में राज्यश्रीकुमारी (भुआ) और सिद्धि कुमारी (भतीजी) के बीच चल रहे संपत्ति संबंधी विवाद के बीच आज बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्यश्रीकुमारी आज जूनागढ़ स्थित पुश्तैनी मंदिर में दर्शन करने के लिए अपने वकीलों के साथ पहुंची। इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोक लिया।

राज्यश्री कुमारी ने कहा कि मैं यहां पुश्तैनी मंदिर के दर्शन के लिए आई थी लेकिन, मुझे रोका गया जो गलत है। इस दौरान मौके पर तैनात कोटगेट थानाप्रभारी विश्वजीत सिंह से मीडिया ने बात की तो उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के लीगल एडवाइजर आ रहे हैं उसके बाद स्थिति साफ होगी।
आपको बता दें कि बीकानेर राज परिवार में संपत्ति की वसीयत को लेकर पिछले लंबे समय से विवाद चल रहा है, जिसको लेकर मामला कोर्ट तक पहुंचा। हालांकि, हाल ही में कोर्ट ने राजश्री कुमारी के पक्ष में फैसला दिया है।
बीकानेर राजपरिवार वसीयत प्रकरण : सुशीला कुमारी द्वारा की गई वसीयत पर रोक, राज्यश्री कुमारी को मिली राहत
बीकानेर। बीकानेर राजपरिवार के न्यायालय में वसीयत से संबंधित लंबित विवाद में महत्वपूर्ण फैसले में राज्यश्री कुमारी को बड़ी राहत प्रदान करते हुए न्यायालय ने डॉ. महाराजा करणी सिंह की वसीयत को अंतिम मानते हुए राजमाता सुशीला कुमारी की वसीयत पर रोक लगा दी है।
प्रकरण के अनुसार, स्व. महाराजा डॉ करणीसिंह व स्व. राजमाता सुशीला कुमारी की वसीयत से ऐस्टेट के एडमिनिस्ट्रेशन की बाबत लम्बित वाद में न्यायालय अपर जिला न्यायाधीश, संख्या 3, बीकानेर ने राज्यश्री कुमारी के निवेदन पर स्थगन आदेश दिया है। राजमाता सुशीला कुमारी के देहान्त के पश्चात सुश्री सिद्धि कुमारी ने न्यायालय जिला न्यायाधीश संख्या 3, बीकानेर में एक वाद संख्या 46/2023 (सीआईएस 53/2023) अपनी भुआ राज्यश्री कुमारी व मधुलिका कुमारी वगैरह के खिलाफ दायर किया था जिसमें सिद्धि कुमारी द्वारा यह उल्लेखित किया गया कि महाराजा डॉ करणीसिंह एवं राजमाता सुशीला कुमारी की वसीयत में वर्णित सम्पतियों पर नियन्त्रण एवं कब्जा महाराजा डॉ करणीसिंह की वसीयत के अनुसार एडमिनिस्ट्रेशन नियुक्त होने के नाते प्रतिवादीगण अर्थात राज्यश्री कुमारी के कब्जे व नियन्त्रण में है तथा प्रतिवादीगण द्वारा करणीसिंह की वसीयत के विरुद्ध आचरण किए जाने के आधार पर महाराजा करणीसिंह की वसीयत में वर्णित सम्पतियों की बाबत उन्हें एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया जाकर राज्यश्री कुमारी से उक्त सम्पतियों, हिसाब किताब का नियन्त्रण व कब्जा दिलाया जाए।
उक्त वाद में राज्यश्री कुमारी द्वारा एक अस्थायी निषेधाज्ञा प्रार्थना पत्र इस आधार पर पेश किया कि मूल वाद में सिद्धि कुमारी द्वारा माना है कि समस्त सम्पतियों एवं हिसाब किताब का नियन्त्रण एवं कब्जा बहैसियत एडमिनिस्ट्रेटर प्रतिवादी यानी राज्यश्री कुमारी के पास हैं तथा सिद्धि कुमारी अवैध रुप से उक्त सम्पतियों को खुर्द-बुर्द करने का प्रयास कर रही हैं एवं एडमिनिस्ट्रेटर राज्यश्री कुमारी को एडमिनिस्ट्रेशन करने में बाधा उत्पन्न करके सम्पतियों को खुर्द-बुर्द करने की धमकियां दे रही हैं। उक्त प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के पश्चात न्यायालय एडीजे 3, बीकानेर द्वारा राज्यश्री कुमारी के एडमिनिस्ट्रेटर होने तथा सम्पतियों पर कब्जा एवं हिसाब किताब का नियन्त्रण होने के तथ्य को सही मानते हुए राज्यश्री के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए महाराजा डॉ करणीसिंह की वसीयत में वर्णित तमात चल-अचल सम्पतियों की बाबत रहन, बय, मुन्तकिल हस्तान्तरित करने से रोकने बाबत उभय पक्षकारान के विरुद्ध अस्थाई निषेधाज्ञा आदेश जारी किया।
मूल वाद की वादिनी सिद्धि कुमारी ने भी अपने वाद में उक्त सम्पतियों का एडमिनिस्ट्रेटर महाराजा डॉ करणीसिंह की वसीयत के अनुसार राजमाता सुशीला कुमारी, महाराज अरविन्दसिंह, राजसिंह डूंगरपुर, नरीमन मानेकशा तथा राज्यश्री कुमारी का होना स्वीकार किया तथा सम्पतियों का कब्जा एडमिन्स्ट्रेटर में निहित होना स्वीकार किया।
ज्ञातव्य हैं कि महाराजा डॉ करणीसिंह की वसीयत के उक्त सभी एडमिनिस्ट्रेटरान में से राज्यश्री कुमारी अकेली जिंदा एडमिनिस्ट्रेटर रही है। प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी के उक्त प्रार्थना पत्र पर न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनने व पत्रावली का ध्यानपूर्वक अध्ययन करने पश्चात निष्कर्ष निकाला कि हस्तगत प्रकरण निस्तारण के लिए न्यायालय निम्नलिखित तीन बिन्दुओं पर विचार करके सभी बिन्दुओं को राज्यश्री कुमारी के पक्ष में होना निश्चित पाया है। राज्यश्री कुमारी की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अस्थाई निषेधाज्ञा अन्तर्गत आदेश 39 नियम 1 व 2 एवं धारा 151 सी.पी.सी. स्वीकार कर अभय पक्षों को ताफैसला मूलवाद इस आशय की अस्थाई निषेधाज्ञा से वर्जित किया जाता हैं कि वे वादपत्र में वर्णित महाराजा करणीसिंह की वसीयत दिनांक 26.06.1986 में वर्णित तमाम जायदाद चल-अचल संपतियों को मूलवाद के लंबनकाल के दौरान खुर्द-बुर्द, रहन, विक्रय हस्तांतरण नही करेंगे।






