Tuesday, June 23, 2026
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जोधपुर में प्रसूताओं का मामला : स्वास्थ्य में सुधार का दावा, हाई डायबिटीज एवं पीलिया ग्रस्त का एम्स में उपचार जारी

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जयपुर Abhayindia.com चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने मंगलवार को कहा कि जोधपुर में पावटा जिला अस्पताल और एम्स में भर्ती प्रसूताओं के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पावटा जिला अस्पताल में भर्ती 6 प्रसूताओं का स्वास्थ्य सामान्य है और एम्स में भर्ती हाई डायबिटीज एवं ब्लड प्रेशर की प्रसूता और पीलिया ग्रस्त प्रसूता का स्वास्थ्य स्थिर है तथा सभी प्रसूताओं की 24 घंटे स्वास्थ्य एवं उपचार की मॉनिटरिंग की जा रही है।

खींवसर ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा पूरे प्रकरण को संवेदनशीलता के साथ मॉनिटर किया जा रहा है। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने सोमवार देर रात जोधपुर पहुंचकर भर्ती सभी प्रसूताओं के स्वास्थ्य एवं उपचार की प्रगति की जानकारी ली है और प्रसूताओं के पूरे प्रकरण की तथा स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं तथा मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात कर कुशलक्षेम पूछी तथा उन्हें राज्य सरकार की ओर से सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आश्वस्त किया तथा भरोसा दिलाया कि उपचार में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरती जाएगी।

उन्होंने बताया की नागौर और डीडवाना में प्रसूताओं के दोनों प्रकरणों की रिपोर्ट विस्तार से प्राप्त की है। उपलब्ध तथ्यों और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही सामने नहीं आई है। नागौर की प्रसूता रुकमा देवी की डिलीवरी सफलतापूर्वक संपन्न हुई थी तथा प्रसव के बाद माता और शिशु दोनों का स्वास्थ्य सामान्य था। बाद में अचानक सीने में दर्द की शिकायत होने पर चिकित्सकों ने तत्काल आवश्यक उपचार देते हुए उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर किया, लेकिन दुर्भाग्यवश रास्ते में उनका निधन हो गया। चिकित्सकों के अनुसार प्रारंभिक तौर पर हृदयाघात की संभावना प्रतीत होती है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इसी प्रकार खुनखुना निवासी मोनिका का स्थानीय स्तर पर उपचार चल रहा था। उन्हें राजकीय बांगड़ चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां जांच के दौरान उनका रक्तचाप अत्यधिक उच्च स्तर 200/150 पाया गया। चिकित्सकों ने पूरी सतर्कता के साथ उनकी स्थिति को स्थिर करने के प्रयास शुरू किए, क्योंकि ऐसी परिस्थिति में तत्काल प्रसव कराना जोखिमपूर्ण हो सकता था। दुर्भाग्यवश प्रसव से पूर्व ही उनका निधन हो गया।

उन्होंने बताया कि हमारे चिकित्सा संस्थान प्रदेशभर में 24X7 आमजन की सेवा के लिए निरंतर कार्यरत हैं। हमारे चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति जनता के भरोसे का ही परिणाम है कि प्रतिदिन हजारों मरीज सरकारी चिकित्सा संस्थानों में उपचार प्राप्त कर रहे हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में हमारे संस्थानों में प्रसव की सफलता दर 99.99 प्रतिशत है, जो हमारी चिकित्सा व्यवस्था की गुणवत्ता, चिकित्सकों की दक्षता और समर्पण को दर्शाती है। राज्य सरकार प्रत्येक मामले की पूरी संवेदनशीलता, पारदर्शिता और तथ्यात्मक आधार पर समीक्षा करती है।

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