Monday, June 22, 2026
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संपादकीय : “अभय इंडिया” स्‍थापना के 15वें वर्ष में प्रविष्‍ट, पाठकों के अटूट जुड़ाव से धराशायी हुई चुनौतियां

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आज का दिन केवल “अभय इंडिया” की स्‍थापना के जश्‍न का नहीं है, बल्कि यह दिन उस संकल्‍प को और मजबूत करने का है जिसके साथ हमने 22 जून 2012 को इसकी शुरूआत साप्‍ताहिक समाचार पत्र के रूप में की थी। लेकिन, बाद में पत्रकारिता के बदलते स्‍वरूप को भांपते हुए वर्ष 2017 में हमने इसके डिजिटल प्रारूप की शुरूआत की। तब डिजिटल प्रारूप अपने शैशवकाल में था। आज यह मुख्‍यधारा की पत्रकारिता का सबसे मजबूत माध्‍यम बन गया है। “अभय इंडिया” का डिजिटल प्रारूप हर रोज आपके मोबाइल के माध्‍यम से स्‍थानीय, प्रदेश सहित देश-दुनिया की खबरों के साथ आपके मन के दरवाजे खोलने आता है।

आपको बता दें कि “अभय इंडिया” का जन्‍म संघर्ष और संकल्‍प की बुनियाद पर ही हुआ है। बीते 14 साल के सफर के दौरान हमने जनभावनाओं से जुड़े कई मुद्दे उठाए और उन्‍हें भरसक अंजाम तक भी पहुंचाया। इस दौरान हम कभी भी कॉर्पोरेट दबावों में नहीं आए। सत्ता के गलियारों में गढ़ी गई कहानियों के पिछलग्‍गू नहीं बने। इसकी वजह भी साफ थी। और वो थी हमारे सजग पाठकों का अटूट विश्‍वास। इस विश्‍वास के दम पर ही हमें सिस्‍टम की कमियों को उजागर करने की ताकत मिली।

सब जानते हैं सत्ता से तीखे सवाल पूछना और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना आसान नहीं होता। कई बार चौथे स्‍तंभ के विरोधियों ने अनपेक्षित दबाव बनाए, लेकिन आप सबका विश्वास सबसे बड़ी ढाल बनकर हमारे साथ खड़ा नजर आया। और चुनौतियां हमेशा धराशायी होती नजर आई। हम आगे के लिए भी आश्‍वस्‍त है कि आपका स्नेह इसी तरह मिलता रहेगा। सच और विश्वास की यह मशाल इसी तरह आगे भी जलती रहेगी। हालांकि, चुनौतियां अब भी बनी हुई है। आपको बता दूं कि भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती प्रोपेगैंडा और फेक न्यूज  होगी। इससे मुकाबला पूरी शिद्दत से करने की जरूरत होगी।

इस स्थापना दिवस पर यह संकल्प एक फिर से दोहराना होगा कि हम विश्वसनीयता और सटीकता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे। हम आधुनिक संचार तकनीक के जरिये आपको और अधिक गहराई से जमीनी हकीकत से रूबरू करवाने की भरसक कोशिश करेंगे। यहां आपको यह भी बता दें कि वर्ष 1991 में मैंने बीकानेर के लोकप्रिय समाचार पत्र दैनिक युगपक्ष से मैंने पत्रकारिता की शुरूआत की थी। बाद में  करीब 22 वर्षों तक दैनिक नवज्‍योति, दैनिक भास्‍कर और राजस्‍थान पत्रिका में रहते हुए पत्रकारिता की जिम्‍मेदारी निभाई। इस दौरान आपके विश्‍वास और सहयोग से अभय इंडिया की नींव पड़ी जो अब बुलंद इमारत की मानिंद नजर आ रही है। इस सफर में पाठकों ने जो गहरा जुड़ाव दिखाया वो अपने आप में एक मिसाल बन गया। आखिर में सभी सजग पाठकों, शुभचिंतकों और आलोचकों का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं जो हमें इस मुकाम तक पहुँचाने में मददगार बने। उम्‍मीद करते हैं आपका यह जुड़ाव आगे भी कायम रहेगा। -सुरेश बोड़ा, संपादक, अभय इंडिया, 9829217604

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