Saturday, April 25, 2026
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ज्ञान भारतम् मिशन के स्वतंत्र केंद्र अभय जैन ग्रन्थालय का किया गया निरीक्षण, प्राचीन ज्ञान परंपरा का जीवंत केंद्र

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बीकानेर Abhayindia.com भारतम् मिशन के अंतर्गत कला एवं संस्कृति मंत्रालय के स्वतंत्र केंद्र अभय जैन ग्रन्थालय में विद्वानों एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण विज़िट संपन्न हुई। इस अवसर पर संस्कृत भारती के अखिल भारतीय महामंत्री सत्यनारायण भट्ट, पांडुलिपि समन्वयक सुरेन्द्र कुमार शर्मा, अवधेश वशिष्ठ तथा संस्कृत भारती बीकानेर महानगर मंत्री दाऊ लाल साध ने ग्रन्थालय का गहन निरीक्षण किया।

अभय जैन ग्रन्थालय के निदेशक ऋषभ नाहटा ने अतिथियों को ग्रन्थालय में संरक्षित लगभग दो लाख हस्तलिखित पांडुलिपियों एवं डेढ़ लाख से अधिक प्राचीन एवं आधुनिक पुस्तकों का अवलोकन कराया। इन ग्रंथों में वेद, उपनिषद, दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष, व्याकरण, इतिहास सहित विविध शास्त्रीय विषयों से संबंधित अमूल्य ज्ञान-सामग्री संकलित है।

निरीक्षण के दौरान यह भी अवगत कराया गया कि भारत सरकार के ज्ञान भारतम् मिशन के माध्यम से अभय जैन ग्रन्थालय में पांडुलिपियों की स्कैनिंग एवं डिजिटाइजेशन का कार्य निरंतर प्रगति पर है, जिससे दुर्लभ ग्रंथों का दीर्घकालीन संरक्षण सुनिश्चित हो सके तथा शोधार्थियों, विद्वानों एवं विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से इनका शैक्षणिक लाभ प्राप्त हो सके।

अतिथियों ने अभय जैन ग्रन्थालय को भारतीय ज्ञान परंपरा का एक दुर्लभ, सशक्त एवं जीवंत केंद्र बताते हुए कहा कि यह ग्रन्थालय न केवल अतीत के बौद्धिक वैभव को सुरक्षित रखे हुए है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए शोध, अध्ययन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण तथा उनके शैक्षणिक उपयोग को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक विस्तार देने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर संस्कृत भारती के अखिल भारतीय महामंत्री सत्यनारायण भट्ट ने कहा “अभय जैन ग्रन्थालय जैसे संस्थान भारत की आत्मा हैं, जहाँ शास्त्र और संस्कृति जीवंत रूप में सुरक्षित है। ऐसे ग्रन्थालयों का संरक्षण और संवर्धन राष्ट्रीय दायित्व है।” विज़िट के अंत में अतिथियों ने ग्रन्थालय प्रबंधन एवं ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत संचालित संरक्षण, सर्वेक्षण एवं डिजिटाइजेशन कार्यों की सराहना की। इस अवसर पर ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत कार्यरत सर्वेक्षण अधिकारी मोहित बिस्सा, लवकुमार देराश्री, नवरत्न चोपड़ा, लक्ष्मी कांत उपाध्याय की सक्रिय सहभागिता भी उल्लेखनीय रही।

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