








राधाजी के जन्मोत्सव (राधा अष्टमी) का पूजन मुहूर्त रविवार, 31-08-2025 को मध्यान्ह 11:20 से 13:53 बजे के मध्य रहेगा। राधा अष्टमी का पर्व भगवान कृष्ण की अर्धाङ्गिनी देवी राधा के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाया जाता है। राधा अष्टमी के दिन भक्तगण एक दिवसीय व्रत का पालन करते हैं। देवी राधा की पूजा मध्याह्नकाल में की जाती है, जो हिंंंदू दिवस विभाजन के अनुसार दोपहर का समय है।
श्री राधा अष्टमी का पर्व ब्रज क्षेत्र में विशेषतः बरसाना में अत्यन्त धूम-धाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर बरसाना स्थित श्री लाडली जी मन्दिर में विशाल महोत्सव का आयोजन किया जाता है जिसके अन्तर्गत श्री राधा जी का अभिषेक एवं विशेष पूजन किया जाता है। राधा अष्टमी को राधाष्टमी और राधा जयन्ती के नाम से भी जाना जाता है।
बृहन्नारदीयपुराण में प्राप्त वर्णन के अनुसार, श्री राधा अष्टमी का व्रत करने से इसका विशेष पुण्य लाभ प्राप्त होता है। सर्वप्रथम स्नानादि दैनिक कर्मों से निवृत्त होकर स्वच्छ एवं शुद्ध वस्त्र धारण करें। तदुपरान्त एक मण्डप के भीतर एक मण्डल की रचना कर उसके मध्य में मिट्टी अथवा ताम्बे का कलश स्थापित करें। कलश के ऊपर एक ताम्बे का पात्र रखें तथा उस ताम्बे के पात्र पर देवी श्री राधारानी की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा को दो नवीन वस्त्रों से ढक दें। तत्पश्चात् मध्याह्नकाल में राधारानी की षोडशोपचार विधि द्वारा श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करें। सामर्थ्यानुसार पूर्ण दिवस उपवास करें। यदि असमर्थ हैं तो एकभुक्त व्रत करें। व्रत के आगामी दिवस पर सुहागिन स्त्रियों को प्रेमपूर्वक भोजन करवायें। -भैरव रतन बोहरा, जोशीवाड़ा, बीकानेर


