Thursday, June 25, 2026
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सफेद दाग (ल्युकोडर्मा-विटिलिगो) और होम्योपैथी

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बीकानेर Abhayindia.com सफेद दाग (Leukoderma/Vitiligo) एक त्‍वचा रोग है। इस रोग मे व्यक्ति के शरीर पर अलग-अलग स्‍थानों पर विभिन्न आकार के सफेद दाग होते हैं।

विटिलिगो के मुख्य कारण : मेलेनिन, फोलिक एसिड, विटामिन डी3 और विटामिन बी12 की कमी, खून से संबंधित एलर्जी, गलत खाना-पीना और स्किन इन्फेक्शन है।

सफेद दाग के मुख्य प्रकार…

यूनिवर्सल विटिलिगो : यह विटिलिगो शरीर के सभी हिस्सों में हो सकता है। यानी कि सफेद दाग चेहरे से लेकर पैरों तक सभी जगह होते हैं।

सेगमेंटल विटिलिगो : यह शरीर के किसी खास हिस्से में होता है। आमतौर पर यह 1 से 2 साल तक फैलता है और उसके बाद ही इसका फैलना रुकता है।

सामान्यकृत विटिलिगो : यह सबसे आम विटिलिगो है, जो शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकता है और कभी भी बढ़कर रुक भी सकता है।

फोकल विटिलिगो : फोकल विटिलिगो, आकार में छोटा होता है और केवल शरीर के किसी खास हिस्से में होता है।

एग्रोफेशियल विटिलिगो : यह विटिलिगो खासकर चेहरे पर होता है और कभी-कभी हाथों-पैरों पर दिखता है।

होम्योपैथी मे विटिलिगो का उपचार रोगी के लक्षणों के आधार पर दवाई देकर किया जाता हैं जिससे की रोग जड़ से ठीक होता है।

विटिलिगो की कुछ होम्योपैथी दवाइयाँ : Arsenic, Murcurius Sol, Calcaria Carb etc.

नोट : दवाई होम्योपैथी चिकित्सक के परामर्श से ही लेवें।

होम्योपैथी में प्रत्येक रोग को ठीक करने की क्षमता है क्योंकि इसमे प्रत्येक रोगी के शारीरिक एवं मानसिक लक्षणों के अनुरूप दवाई दी जाती जिससे रोग जड़ से ठीक होता है। होम्योपैथी केवल Chronic Disease मे लाभकारी है यह गलत धारणा बनी हुई हैं यह त्वरित रोगों मे भी एलोपैथी के समान ही तुरन्त आराम देता है। -डॉ. भाग्‍यश्री कुलरिया (कुलरिया होम्‍योपैथी क्‍लीनिक) बीकानेर

बवासीर और होम्योपैथी, संभव है सफल इलाज…

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