ऑनलाइन शिक्षा पद्धति के महत्व को समझने की दरकार : डॉ. राघव

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बीकानेर में परिष्कार की ऑनलाइन कक्षा का उद्घाटन करते संस्थान के संस्थापक डॉ. राघव प्रकाश।
बीकानेर में परिष्कार की ऑनलाइन कक्षा का उद्घाटन करते संस्थान के संस्थापक डॉ. राघव प्रकाश।
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बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज)। ऑनलाइन शिक्षा पद्धति आज के युग की अहम् जरूरत है। हमें आधुनिक तकनीक से जुड़कर शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए। अब बैलगाड़ी की तरह नहीं, बल्कि सुपरफास्ट ट्रेन की तरह शिक्षा ग्रहण होगी।
यह विचार परिष्कार संस्थान जयपुर के संस्थापक डॉ. राघव प्रकाश ने रविवार को यहां विश्वकर्मा कॉलोनी स्थित डी. एन. पब्लिक सैकंडरी स्कूल में आयोजित सेमीनार में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कही। डॉ. राघव ने ऑनलाइन शिक्षा पद्धति के महत्व को प्रतिपादित करते हुए कहा कि परिष्कार के पास जयपुर में उच्च कोटि की एज्यूकेशन फैकल्टी है, लेकिन उसका लाभ समूचे प्रदेश और देश तक पहुंचाने के लिए हमने ऑनलाइन सेंटर स्थापित किए है। बीकानेर में स्थाापित सेंटर में बड़ी संख्या में विद्यार्थी नई और आधुनिक तकनीक से शिक्षा के क्षेत्र में एक अहम् मुकाम हासिल कर रहे हैं।

अपने उद्बोधन की शुरूआत बीकानेर के जनकवि हरीश भादाणी और प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. नंदकिशोर आचार्य के नामों का उल्लेख करते हुए डॉ. राघव प्रकाश ने कहा कि बीकानेर प्रतिभाओं की खान है। यहां जरूरत है बस आधुनिक तकनीक से जुड़कर शिक्षा प्राप्त करने की। उन्होंने कहा कि परिष्कार के पास अनुभवी शिक्षकों की पूरी टीम है जो बच्चों को एकेडमिक पढ़ाई के साथ उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिहाज से भी तैयार करती है। इसमें विश्व स्तर की तमाम तकनीकी सुविधाओं का सहारा लिया जाता है ताकि विद्यार्थी स्पद्र्धा के युग में कहीं पिछड़े नहीं। डॉ. राघव ने कहा कि उनकी लिखी हिन्दी व्याकरण की पुस्तक काफी लोकप्रिय हुई थी। एक शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों को उसका लाभ पहुंचाने तथा उन्हें वर्तमान युग के हिसाब से तैयार करने के लिए परिष्कार की स्थापना की गई थी। आज परिष्कार से पढ़कर निकलने वाले विद्यार्थी देश-प्रदेश में उच्च पदों पर आसीन होकर समाज की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने देश की शिक्षा पद्धति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय स्तर पर शिक्षा का ग्राफ काफी बिगड़ चुका है। पूरे एक साल में महज एक ही परीक्षा ली जाती है और वो भी महज तीन घंटे की। परिष्कार में ऐसा नहीं है। हमारे यहां विद्यार्थियों के लिए बाकायदा टेस्ट सीरिज तैयार की गई है ताकि बच्चा खुद को परख सके। शिक्षकों को भी पता चल सके कि उनका विद्यार्थी कहां कमजोर पड़ रहा है। ऑनलाइन टेस्ट सीरिज की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए डॉ. राघव प्रकाश ने कहा कि आज के युग की यह महत्ती जरूरत बन गई है। परिष्कार ने इसकी उपयोगिता को समझते हुए अपने सभी सेंटर्स में यह सुविधा मुहैया कराई है।

सेमीनार में परिष्कार से जुड़े डॉ. हितेन्द्र शर्मा ने कहा कि परिष्कार कॉलेज प्रदेश का ऐसा महत्वपूर्ण कॉलेज है जिसने अपनी स्थापना से अब तक 25 से ज्यादा मैरिट दी है। नेक ग्रेड प्राप्त कॉलेज के विद्यार्थियों ने परीक्षाओं में ही नहीं, बल्कि खेल सहित अन्य गतिविधियों में भी सफलता का परचम फहराते हुए अब तक 107 पदक अपनी झोली में डाले हैं। डॉ. शर्मा ने दावा करते हुए कहा कि परिष्कार में फीस मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए ली जाती है। प्रवेश से पहले विद्यार्थियों को तीन दिवसीय आवासीय शिविर ज्वॉइन कराया जाता है। इसमें संतुष्टि के बाद उन्हें प्रवेश देते हुए शिक्षा की मुख्यधारा जोड़ा जाता है। एकेडमी अध्ययन के साथ उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है ताकि स्नातक के बाद वो उक्त परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सके।
सेमीनार में परिष्कार बीकानेर की संचालिका दुर्गा सुथार, अंतरराष्ट्रीय साइक्लिस्ट गणेश लाल सुथार, नारायण सुथार आदि ने भी विचार रखे। इससे पहले डॉ. राघव प्रकाश ने ऑनलाइन कक्षा का फीता काटकर उद्घाटन किया। बीकानेर परिष्कार संस्थान की ओर से डॉ. राघव प्रकाश, डॉ. हितेन्द्र शर्मा का शॉल, साफा तथा प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।