








शेयर ट्रेडिंग शेयर ट्रेडिंग एक चुनौतीपूर्ण व्यवसाय है। यह एक ऐसा व्यवसाय है जहाँ व्यक्ति बाज़ार के मूल सिद्धांतों के ज्ञान, धैर्य, आत्म-अनुशासन और मन पर उचित नियंत्रण के साथ साथ भाग्य से भी धन कमा सकता है। वास्तुशास्त्र प्राकृतिक कारक है जो आपकी सफलता को उच्चतम स्तर पर ले जा सकता है। वास्तुशास्त्र में ऐसे बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रभावी दिशानिर्देश हैं जो आपके निवेश और बचत की सफलता को नियंत्रित कर करते हैं। पहले लोगों को लगता था कि शेयर बाजार सिर्फ अमीरों का खेल है, लेकिन अब ये सोच बदल गई है। आम आदमी भी शेयर बाजार में निवेश करने लगा है।
हाल ही में हुआ शेयर बाज़ार में उतार चढ़ाव यह बताता है कि केवल शेयर बाज़ार का ज्ञान होना ही पर्याप्त नहीं है इसके लिए यदि वास्तु शास्त्र के सरल उपायों को अपनाकर आप अपने निवेश को एक नई दिशा दे सकते हैं और लाभ की संभावना को बढ़ा सकते हैं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, ख़ुशहाल जीवन जीने के लिए पंच तत्व जैसे पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का संतुलन बनाए रखना बहुत ज़रूरी होता है। आप इन तत्वों को कुछ इस तरह जोड़ सकते हैं जैसे रंगों का ख़ास ध्यान रखें, पृथ्वी तत्वों से जुड़े रहने के लिए हल्के हरे या फिर भूरे रंग के फ़र्नीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं। आकाश तत्व से जुड़ने के लिए ट्रेडिंग रूम की दीवारों का रंग हल्का नीला करवा सकते हैं। जल तत्व से जुड़ने के लिए आप अपनी डेस्क के बग़ल में एक्वेरियम रख सकते हैं, जब आप इन सब चीज़ों का ध्यान रखेंगे तो चारों तरफ़ से सिर्फ़ और सिर्फ़ सकारात्मक ऊर्जा ही होगी। मुख्य द्वार के बाहर एक लाल डोरमैट रखें, यह आपके कार्यालय में प्रवेश करने वाले व्यक्ति के मन से किसी भी प्रकार की शत्रुता को दूर भगाता है। लाल रंग एक गतिशील रंग है जो ऊर्जा और अग्नि तत्व से जुड़ा है।
शेयर मार्केट या ट्रेडिंग संबंधी कार्य के लिए उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके कार्य करना श्रेष्ठ माना जाता है। अगर आप कंप्यूटर या लैपटॉप पर ट्रेडिंग करते हैं, तो उसे दक्षिण-पश्चिम ज़ोन में रखें और मुंह उत्तर-पूर्व की ओर करके कार्य करें। इससे निर्णय क्षमता मजबूत होती है। ट्रेडिंग या निवेश का निर्णय लेने के लिए जिस जगह पर आप बैठते हैं, वह स्थान दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। यह दिशा स्थायित्व और नियंत्रण की प्रतीक होती है। यहाँ बैठकर किया गया कार्य प्रायः स्थायी लाभदायक होता है। शेयर बाजार में सफलता के लिए बुद्धि और अंतर्ज्ञान का बहुत महत्व होता है।
वास्तु के अनुसार, ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) का सीधा संबंध मानसिक शुद्धता और आत्मविश्वास से होता है। यहाँ भारी वस्तुएँ, गंदगी या कबाड़ नहीं होना चाहिए। यह दिशा जितनी स्वच्छ, शांत और हल्की होगी, उतनी ही आपकी सोच स्पष्ट होगी। यदि आप निवेश से प्राप्त लाभ को अपने घर या ऑफिस में रखते हैं, तो तिजोरी को दक्षिण दिशा की दीवार के साथ रखें और तिजोरी का मुँह उत्तर दिशा की ओर हो। यह दिशा धन को आकर्षित करती है और आर्थिक स्थिरता प्रदान करती है। शेयर ट्रेडिंग फर्मों के केंद्रीय स्थान में कम भार रखना चाहिए। यदि भार अधिक होगा तो टीम भावना की कमी होगी जिसके कारण संगठनों के असफल होने की संभावना रहती हैं।
उत्तर दिशा कुबेर की दिशा मानी जाती है। यहाँ तुलसी का पौधा लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और धन संबंधित कार्यों में सफलता मिलती है।
केस स्टडी-1
मैंने विश्वनाथजी के पश्चिम मुखी घर का अवलोकन किया। उनके शेयर बाजार का ऑफिस घर में ही था और दक्षिण-पश्चिम में था लेकिन उनके नैऋत्य कोण में अण्डरग्राउंड था और ईशान कोण भी ऊँचा था। इस घर की दो पीढ़ी ने शेयर बाजार का काम किया परंतु हर बार इसी विश्वास के साथ जोखिम उठाते रहें कि अब फ़ायदा होगा परंतु ऐसा नहीं हुआ और एक दिन उनको अपना घर बेचकर कर्ज उतारना पड़ा।
केस स्टडी-2
मैंने साहिल का घर देखा उसका घर दक्षिण मुखी था और साथ ही पश्चिम मुखी भी था। उनके दक्षिण वाले द्वार पर द्वार वेध लग रहा था। दुर्भाग्यवश उन्हें वह घर बेचना पड़ा। अमावस्या और ग्रहण के दिनों में निवेश करने से बचना चाहिए और यदि संभव हो तो कोशिश जरूर करनी चाहिए कि कार्य मुहूर्त के साथ करना चाहिए। तुलसी का नियमित पूजन और दीपक जलाने से शेयर में निवेश का लाभ मिलने की संभावना बढ़ती है।
शेयर बाजार में सफलता केवल भाग्य का खेल नहीं है, बल्कि सही रणनीति, संयम, शोध और सकारात्मक ऊर्जा का मेल होता है। थोड़ी समझदारी, धैर्य और सही जानकारी के साथ, एक आम आदमी भी शेयर बाजार के ज़रिए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकता है। -सुमित व्यास, एम.ए (हिंदू स्टडीज़), काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी, मोबाइल – 6376188431


