






बीकानेर Abhayindia.com भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी) (ICAR-National Research Centre on Camel (NRCC)) में आज एक दिवसीय राष्ट्रीय कर्मयोगी जनसेवा के दूसरे चरण के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें एनआरसीसी, सीआईएएच बीकानेर तथा आईवीआरआई, इज्जतनगर के कुल 26 प्रशिक्षणार्थियों को यह ट्रेनिंग दी गई। कार्यक्रम के दौरान सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को iGOT ऐप के माध्यम से यह प्रशिक्षण कराया गया। प्रशिक्षण सत्र में लॉग-इन प्रक्रिया, प्रोफाइल निर्माण, पाठ्यक्रम चयन, राष्ट्रीय कर्मयोगी के विभिन्न मॉड्यूल ऑनलाइन पूर्ण करने संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। सभी प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण कर प्रमाण-पत्र एवं पारितोषिक प्राप्त किए।
इस अवसर पर केन्द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने कहा कि कर्मयोगी मिशन केंद्र सरकार की एक दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य सरकारी कार्मिकों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सक्षम बनाना है। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्रत्येक कार्मिक अपनी भूमिका के अनुसार ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण को निरंतर उन्नत कर सकता है। उन्होंने कहा कि मिशन कर्मयोगी केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मचारियों में दक्षता, उत्तरदायित्व और सेवा-भावना के विकास पर केंद्रित है।
मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. जगदीश राणे, निदेशक, भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर भी एनआरसीसी में आयोजित कर्मयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में निरंतर सीखना आवश्यक है, और iGOT प्लेटफॉर्म कर्मचारियों को अपनी सुविधा अनुसार सीखने का अवसर प्रदान करता है। इससे कार्यकुशलता बढ़ेगी और कार्यालयीन कार्यों में गुणवत्ता आएगी।
कार्यक्रम के मास्टर ट्रेनर एवं नोडल अधिकारी, एचआरडी डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता संवर्धन, डिजिटल दक्षता और निरंतर सीखने की संस्कृति को सुदृढ़ करना है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के अवसर पर केन्द्र के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अखिल ठुकराल भी उपस्थित रहे।
प्रशिक्षार्थियों ने प्रशिक्षण के संबंध में फीडबैक देते हुए इसे उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया तथा कहा कि प्रशिक्षण से वे अपने कार्य से संबंधित कौशल को और अधिक बेहतर ढंग से विकसित कर सकेंगे। कार्यक्रम सह-समन्वयक के रूप में डॉ. बसंती ज्योत्सना, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने संचालन किया एवं डॉ. प्रियंका गौतम, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया। कार्यक्रम के सफल निष्पादन में केन्द्र के डॉ. विश्व रंजन उपाध्याय, डॉ. राकेश कुमार पूनिया एवं अन्य समिति सदस्यों ने भी सक्रिय योगदान दिया।


